अग्रसेन की बावड़ी में फिर भरेगा पानी

Author:बलिराम सिंह
Source:दैनिक भास्कर, 29 अप्रैल 2014
जल संरक्षण के जरिए परियोजना को मूर्त रूप देगा एएसआई
कनॉट प्लेस में भूमिगत पार्किंग की वजह से सूख गई बावड़ी


अग्रसेन की बावड़ीदिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक उग्रसेन की बावड़ी एक बार फिर पानी से लबालब नजर आएगी। आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) इस बावड़ी में वाटर कंजरवेशन की व्यवस्था करने जा रहा है, ताकि आसपास के इलाकों से बारिश का पानी बावड़ी में इकट्ठा हो। यदि ऐसा होता है तो दिल्लीवालों को सुकून भरा एक प्राकृतिक स्थल के अलावा एक पिकनिक स्पॉट मिल जाएगा।

एएसआई के अधिकारियों के मुताबिक दो दशक पूर्व बावड़ी में पर्याप्त पानी होता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान कनॉट प्लेस में बड़े पैमाने पर इमारतों का निर्माण किया गया। इन इमारतों के भूतल से नीचे दो से तीन मंजिला भूमिगत पार्किंग का भी निर्माण किया जा चुका है, जिसकी वजह से कनॉट प्लेस में जल स्तर काफी नीचे चला गया और बावड़ी सूख गई।

हालांकि सूखने के बावजूद आज भी यह बावड़ी युवाओं के लिए पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है। गर्मियों के इस मौसम में सुकून के दो पल तलाशने के लिए यहां पर रोजाना 600 के करीब युवा आ रहे हैं। सर्दियों में यह संख्या बढ़कर दो हजार से ऊपर पहुंच जाती है। लगभग 185 फीट गहरी, 60 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी इस बावड़ी का निर्माण 15वीं से 16वीं सदी के दौरान अग्रवाल समाज के पूर्वज राजा उग्रसेन द्वारा कराया गया था।

क्या है योजना


एएसआई के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट वसंत स्वर्णकार कहते हैं कि उग्रसेन की बावड़ी में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इस परियोजना के तहत बारिश के दौरान आसपास के इलाकों में गिरने वाला पानी बावड़ी में इकट्ठा किया जाएगा, ताकि बावड़ी का पुराना स्वरूप लौटे और आसपास के इलाकों में जलस्तर में सुधार हो।

देर से जागा प्रशासन


मजे की बात यह है कि इस बावड़ी के पास में ही नियमों को धता बताते हुए कई मंजिला ऊंची अपार्टमेंट का निर्माण कर दिया गया है। हालांकि बाद में प्रशासन ने जागा तो कनॉट प्लेस के हेली रोड से चंद कदम दूर निर्मित हो रही एनडीएमसी की महत्वाकांक्षी पार्किंग परियोजना को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। परिणामस्वरूप पार्किंग का निर्माण आज तक नहीं हो पाया। उप-राज्यपाल द्वारा गठित द्वारका वाटर बॉडी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य दीवान सिंह का कहना है कि यमुना के बेहद करीब स्थित इस बावड़ी का सूख जाना यह बताता है कि आसपास के इलाके में भूजल की स्थिति बेहद खराब है। यह हमारे लिए एक सूचक यंत्र है। सरकार को इन प्राकृतिक स्रोतों को संवारने के लिए कारगर कदम उठाया जाना चाहिए।

बावड़ी की परिभाषा


अमूमन प्राचीन काल में कुएं की तर्ज पर बावड़ियों का निर्माण किया जाता था। इनमें सीढ़ियां बनी होती हैं और प्राकृतिक स्रोत के जरिए बावड़ी में नीचे से ऊपर की ओर पानी आता है। लोगों को पेयजल की प्राप्ति होती है।

दिल्ली में बावड़ी की स्थिति


कुछ दशक पूर्व दिल्ली में 100 से ज्यादा बावड़ी थी, लेकिन अब इनमें से अधिकांश बावड़ी नष्ट अथवा जर्जर हो गई हैं। फिलहाल एएसआई 15 बावड़ियों की देखरेख कर रहा है। इनमें से फिरोज शाह किला में स्थित बावड़ी, तुगलकाबाद किला में पांच बावड़ी, पुराना किला और लाल किला में एक-एक बावड़ी, वसंत विहार स्थित बावड़ी इत्यादि शामिल हैं।