बढ़ते प्रदूषण से पृथ्वी के अस्तित्व पर मंडराता संकट

Author:देव चौहान

भारत समेत विश्वभर में बढ़ते प्रदूषण की वजह से ओजोन लेयर पर लगातार खतरा मंडरा रहा है,ये वही ओजोन लेयर है जिसको।लेकर पूरा विश्व चिंतित है ओज़ोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है। यह परत सूर्य की हाई फ्रीक्वेंसी की अल्ट्रावायलेट रेज़ की 93 प्रतिशत से 99 प्रतिशत मात्रा को पृथ्वी पर पहुचने से रोकती है  पृथ्वी पर जीवन के लिये  न सिर्फ हानिकारक है बल्कि बेहद खतरनाक भी है जिस अल्ट्रावायलेट रेज़ को ओजोन लेयर रोकने का काम करती है उससे सबसे ज्यादा स्किन कैंसर होने का खतरा रहता है, हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुचाने मैं तीन तरह के प्रदूषण  जिम्मेदार है   जो क्रमशः एयर पॉल्युशन,ध्वनि प्रदूषण और वाटर पॉल्युशन है 

कुछ वक्त पहले आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया कि घर के अंदर और बाहर होने वाले वायु प्रदूषण के कारण हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है, जिसमें 6 लाख बच्चे शामिल हैंपिछले एक साल में ओजोन लेयर में बढ़ते छेद  को लेकर अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बड़ा खुलासा किया कि जो छेद लगातार बढ़ रहा था वो फिलहाल रुक चुका है इसका सबसे बड़ा कारण पिछले एक साल में लंबे अंतराल तक लगा कोरोना की वजह से लॉक डाउनभी है क्योंकि भारत समेत विश्वभर में तीनो प्रदूषण पर एकाएक रोक लग गई थी न सड़को पर गाड़िया दौड़ रही थी जिसकी वजह से ध्वनि प्रदूषण और एयर पॉल्युशन होता है ना उद्योग चल रहे थे जो हवा प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे जतद जिम्मेदार है और न ही पानी प्रदूषित हो रहा था

क्योंकि कचरा बेहद कम एकत्रित हो पाया था इस एक साल में एयर पॉल्युशन कितना कम हुआ इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से उत्तराखण्ड में मौजूद हिमालय की चोटियों को साफ देखा जा सकता था टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसकी एक तस्वीर भी आने अख़बार में प्रकाशित करि थी। भारत की अगर बात की जाए यहां ध्वनि प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा है डॉक्टर्स का कहना है कि दिन भर सड़को पर दौड़ती गाड़ियों के हॉर्न ध्वनि प्रदूषण को सबसे ज्यादा बढ़ावा देते है जिसकी वजह से लोगो को कई बीमारियों से झूझना पड़ता है सबसे पहले तो ध्वनि।प्रदूषण से इंसान की सुनने की क्षमता कम हो जाती है वही इसका दूसरा असर मानसिक रूप से भी पड़ता है ध्वनि प्रदूषण के असर से कई लोग झल्लाहट की समस्या से भी झूझते है वही नाक कान और गले पर भी इसके दुष्प्रभाव देखने को मिलते है

हाल ही में जारी एक।अंतराष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के मामले में दुनिया के 30 शहरों में 22 शहर भारत में मौजूद है और उसमें भी देश की राजधानी दिल्ली सबसे अव्वल है आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली में सर्दियां शुरू होते है सबसे ज्यादा प्रदूषण सामने आता है जिसकी वजह से लोगो की सहूलियत के लिए अब व्यवसासियों ने ऐसी दुकानें भी खोल रखी है जो आपको 200 रुपये में 15 मिनट के लिए शुध्द ऑक्सीजन  देगी ये वाकई एक चिंता का विषय है कि वो प्राकृतिक संसाधन जो कभी सबके लिए बराबर था आज वो भी हमारी औद्योकिकरण नीतियों की वजह से अमीर और गरीब में बंट गया क्योंकि जाहिर सी बात है कि आम इंसान मात्र 15 मिनट के लिए सिर्फ शुद्ध ऑक्सीजन के लिए 200 रुपये रोज खर्च नही कर सकता।

लेकिन इन सबके बीच आज जिस नए शब्द से दुनिया वाकिफ हुई है यानी लॉकडाउन  क्या हमें इसको अपनी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा मानकर इसे हर महीने उपयोग में लाना चाहिए हम तो यही कहेंगे कि अगर तीनो प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है तो महीने में एक दिन रविवार को विश्वभर में लॉकडाउन लगाना चाहिए क्योंकि हम इसके फायदे देख चुके है जहां प्रदूषित नदियां की वजह से काफी हद तक साफ हुई वही 200 किलोमीटर दूर से वातावरण इतना साफ हो गया कि लोगो को हिमालय पर्वत की चोटियां दिखने लगी प्रकृति प्रेमी शायद इस बात से खुश हो अगर दुनियाभर के प्रधानसेवक पर्यावरण के हित में ये फैसला लेते है कि महीने में एक दिन पूरी तरह  लॉक डाउन रहेगा जो हवा पानी और ध्वनि प्रदूषण पर एक हद तक रोक लगा सके

 

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