भारत उदय एजुकेशन सोसायटी का जैव विविधता पर शपथ ग्रहण अभियान

Author:संजीव कुमार

उत्तर प्रदेश की जैव विविधता के संरक्षण हेतु प्रदेश के 16,966.22 वर्ग किमी वन क्षेत्र में से लगभग 5,170 वर्ग किमी क्षेत्र में 1 राष्ट्रीय उद्यान, 24 वन्य जीव विहार स्थापित किये गये हैं, जोकि प्रदेश के वन क्षेत्र की लगभग 33.6 प्रतिशत तथा कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आड़ू, जामुन व देसी कीकर के पेड़ों की संख्या घटी हैं। चील, गिद्ध, गोरैया, बयां आदि पक्षियों की संख्या तेजी से घटी हैं। बयां के घोंसले पहले वृक्षों पर काफी दिखायी देते थे लेकिन अब न के बराबर हैं।

भारत उदय एजुकेशन सोसाइटी ने सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन लखनऊ (यू.एन.डी.पी.) के सहयोग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बच्चों को जैव विविधता को बचाने की शपथ ली। संस्था ने शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद आदि जिलों में यह अभियान सभी सरकारी/गैर सरकारी विद्यालयों में चलाया गया। इस अभियान के शुरुआती दौर में बच्चों को जैव विविधता के विषय में विस्तार से बताया गया तथा शपथ ग्रहण का आयोजन भी किया गया। इस अभियान के अन्तर्गत संस्था ने पाया कि वास्तव में कईं पेड़-पौधे, पशु-पक्षी विलुप्त हो चुके हैं या होने के कगार पर हैं।यह अभियान अंतरराष्ट्रीय स्तर संचालित हो रहा है। प्रत्येक पांच वर्ष पश्चात जैव विविधता विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कन्वेंशन ऑन बायोडाइवर्सिटी होता हैं। जिसमें जैव विविधता के संरक्षण के लिए दुनिया के सभी राष्ट्राध्यक्षों, वैज्ञानिकों एवं सरकारी/गैर सरकारी संगठनों द्वारा एजेण्डा तैयार किया जाता हैं।

इस बार इस सम्मेलन का आयोजन भारत के शहर हैदराबाद में चल रहा हैं। यह सम्मेलन 19 अक्टूबर तक चलेगा। जैव विविधता के विषय में जागरूक करने के लिए आठ कोच की सांइस एक्सप्रेस ट्रेन चलायी जा रही है जो देश के प्रमुख शहरों में जायेगी। उत्तर प्रदेश की जैव विविधता के संरक्षण हेतु प्रदेश के 16,966.22 वर्ग किमी वन क्षेत्र में से लगभग 5,170 वर्ग किमी क्षेत्र में 1 राष्ट्रीय उद्यान, 24 वन्य जीव विहार स्थापित किये गये हैं, जोकि प्रदेश के वन क्षेत्र की लगभग 33.6 प्रतिशत तथा कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आड़ू, जामुन व देसी कीकर के पेड़ों की संख्या घटी हैं। चील, गिद्ध, गोरैया, बयां आदि पक्षियों की संख्या तेजी से घटी हैं। बयां के घोंसले पहले वृक्षों पर काफी दिखायी देते थे लेकिन अब न के बराबर हैं।

आज से 15-20 साल पहले गधों की संख्या बहुतायत थी लेकिन अब गधों की संख्या काफी घटी हैं। इनकी जगह खच्चरों ने ले ली हैं। सड़कों के किनारे पेड़ों की संख्या काफी कम हुई हैं क्योंकि सड़क चैड़ीकरण में पेड़ काट दिये गये हैं, नये पेड़ नही लगाये गये हैं और यदि लगाये गये हैं तो उनकी भरपाई नही हो पा रही हैं। विश्व में घड़ियालों की संख्या मात्र 182 बची हैं। इस अभियान में सरस्वती इण्टर कालेज शामली, गोल्डन फयूचर पब्लिक स्कूल फुगाना, किसान इण्टर कालेज खरड, डी0ए0वी0 इण्टर कालेज बुढ़ाना, भारद्वाज इण्टर कालेज बुढ़ाना, रामा पी0टी0 कालेज शाहपुर, सेन्ट जेम्स पब्लिक स्कूल मेरठ, महावीर एजुकेशनल पार्क मेरठ आदि स्कूलो एवं कालेजो का विशेष सहयोग रहा।

बच्चों एवं अध्यापकों ने स्कूलों में जैव विविधता के संरक्षण के लिए इको क्लब बनाने, इको गार्डन बनाने एवं पक्षियों के लिए छत पर दाना व पानी रखने आदि पर भविष्य में काम करने का आश्वासन दिया। इस अभियान में सभी बच्चों ने पेड़ लगाने, जल की बचत करना, अपने को जैव विविधता के अनुरूप ढालना व लोगों को जागरूक करना आदि की शपथ ली हैं। इस अभियान के अन्तर्गत संस्था ने 180 स्कूलों के कई हजार बच्चों को शपथ दिलायी हैं। जैव विविधता को बचाने के लिए हम सब मिलकर अपना योगदान सकते हैं। आइये हम स्वयं इस दिशा में कदम उठाये व अपने परिवार तथा मित्रों को भी इसमें शामिल करें।

• प्रकृति के साथ-साथ इसमें निवास करने वाले समस्त जीवों के प्रति आदर एवं समानता को भाव रखें।
• वन्य जीवों के अंगों जैसे खाल, दांत और हड्डियों से बनी वस्तुओं को न खरीदे।
• स्थानीय व मौसमी फलों तथा सब्जियों को ही खरीदें।
• पशु-पक्षियों को शिकार करने तथा तमाशा दिखाने वालों को प्रोत्साहित न करें तथा उन्हे किसी दूसरे रोजगार को अपनाने की सलाह दें।
• कुछ औषधिय तथा सब्जियों की विलुप्त होती प्रजातियों को घर में ही रोपित कर उनकी उचित देखभाल करें।
• जैव विविधता और पर्यावरण से सम्बन्धित कानूनों के अनुपालन में मदद करें।
• पारंपरिक ज्ञान व रीति-रिवाजों के प्रति लोगों को जागरूक करें।
• घरों के आस-पास मोहल्लों मार्गों आदि पर विभिन्न प्रकार के स्थानीय वृक्षों झाड़ियों इत्यादि को रोपित व आस पास के लोगों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
• नदियों से प्रदूषित होने से बचाने के लिए पूजा के बाद बची हुई सामग्रियों इत्यादि को पॉलिथिन में बांधकर नदी में न बहायें।

भारत उदय एजुकेशन सोसायटी द्वारा आयोजित जैव विविधता कार्यक्रम पर शपथ ग्रहण करते बच्चे






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