भारतवर्ष की प्रमुख नदियों के पौराणिक नाम - एक अध्ययन

Author:पुष्पेन्द्र कुमार अग्रवाल, डॉ. शरद कुमार जैन, यतवीर सिंह
Source:राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान
जल मानव जीवन के लिए अमूल्य है तथा जल के बिना जीवन की परिकल्पना भी सम्भव नहीं है। जल का प्रमुख स्रोत होने के कारण नदियों के तट पर विभिन्न संस्कृतियां एवं जन-जीवन विकसित हुए हैं। विश्व की अधिकांश नदियों को उनकी स्थिति, व्यवहार, जल के रंग-रुप एवं पौराणिक किवदंतियों के आधार पर अपने मूल नामों के साथ अन्य पौराणिक एवं वैकल्पिक नामों से भी जाना जाता है। प्रस्तुत प्रपत्र में विश्व की प्रमुख नदियों के साथ-साथ भारतवर्ष की अधिकांश नदियों के पौराणिक नामों तथा संबद्ध मान्यताओं का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

मानव जीवन के लिए जल एक महत्वपूर्ण घटक है। जल के बिना जीवन की परिकल्पना भी संभव नहीं है। पृथ्वी की सतह का तीन चौथाई भाग जल से घिरा होने के कारण पृथ्वी को नीले ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। एक आंकलन के अनुसार पृथ्वी पर 14 लाख घन किलोमीटर जल उपलब्ध है, जिसमें से लगभग 97 प्रतिशत भाग समुद्र एवं महासागरों में खारे जल के रुप में पाया जाता है। पृथ्वी पर उपलब्ध शेष जल का अधिकांश भाग ध्रुव प्रदेशों में बर्फ के रुप में तथा पृथ्वी के नीचे भूजल के रुप में उपलब्ध है, जिसका सरलतापूर्व उपयोग संभव नहीं है। इस प्रकार पृथ्वी पर उपलब्ध जल का बहुत ही सूक्ष्म भाग (>1%) ही उपयोग में लाया जा सकता है। यह जल पृथ्वी पर नदियों, नहरों, जलाशयों, तालाबों एवं झीलों में पाया जाता है।

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