भरी गर्मी में बारिश-ओले, कहीं लेने के देने न पड़ जाएं

Author:अमर उजाला कॉम्पैक्ट
Source:अमर उजाला कॉम्पैक्ट, 2 नवम्बर 2010

अमेरिका के दक्षिण पूर्वी इलाके में पिछले कुछ दशकों से गर्मी के मौसम में अधिक वर्षा हो रही है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे इन बदलावों के चक्कर में लेने के देने पड़ सकते हैं। ड्यूक यूनिवर्सिटी के पर्यावरणविदों ने इसके पीछे भी ग्लोबल वार्मिंग को जिम्मेदार माना है। उन्होंने इसका संबंध उत्तरी अटलांटिक उपोष्णकटिबंधीय (नैश) से जोड़ा है। शोधकर्ताओं ने बताया कि नैश एक उच्च दबाव वाला क्षेत्र है, जो कि प्रत्येक गर्मी के मौसम में बरमुडा के नजदीक बनता है। इसी कारण वहां तूफान का खतरा बना रहता है और नैश ही इसके केंद्र में रहता है।

प्रचंड तूफान हूरिकेन के कारण पश्चिमी यूरोप और उत्तरी पश्चिमी अफ्रीका के मौसम में भी परिवर्तन होता है। इन सबके पीछे ग्लोबल वार्मिंग जिम्मेदार है। पिछले छह दशकों के अमेरिका और यूरोप के मौसम डाटा के आधार पर यह पता चला है कि नैश में औसतन 0.9 मीटर की वृद्घि हुई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में नैश ने अपना दायरा भी बढ़ाया है, जिसके कारण अमेरिका के दक्षिण पूर्वी इलाके में गर्मी के मौसम में भी बहुत अधिक बारिश हो रही है।

प्रमुख शोधकर्ता वेनहोंग ली ने बताया कि यह कोई प्राकृतिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह मौसम परिवर्तन है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहा है। उन्होंने बताया कि उनके अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पृथ्वी पर लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण नैश में भी वृद्घि हो रही है। उन्होंने बताया कि पिछले तीस वर्षों में अमेरिका में गर्मी के मौसम में बारिश लगभग दोगुनी बढ़ गई है।

ली ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में पूरी पृथ्वी पर कार्बन-डाई-ऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा काफी बढ़ गई है, जिससे तापमान में भी अप्रत्याशित वृद्घि हुई है और इस कारण मौसम में भी असमान परिवर्तन हुआ है। अमेरिका के दक्षिणी पूर्वी इलाके में गर्मी के मौसम में बारिश की अधिकता भी इसी मौसम परिवर्तन की देन है।