भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक

Author:देव चौहान
Source:स्मार्ट सिटीज वर्ल्ड

इलेक्ट्रिक कार चार्जर स्टेशन :फोटो:-स्मार्ट सिटीज वर्ल्ड

भारत में हाल ही में देखा गया है की भारत सरकार पर्यावरण को लेकर काफी चिंतित नज़र आ रही है और यही कारण है की सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में जल्द से जल्द उतारने की कोशिश कर रही है अगर हम पूरी तरह से परिवहन  सेवाओं को इलेक्ट्रिक कर सके तो प्रदूषण रोकने में ये एक क्रांतिकारी कदम होगा बढ़ते प्रदूषण और अब इलेक्ट्रिक वाहनों के चलन पर हम कुछ आंकड़े और अध्ययन इस लेख में आपको बताने वाले है। दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन शहर भारत के हैं। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के लोग खतरनाक वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को दूर करने में इलेक्ट्रिक वाहनों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बढ़ता इस्तेमाल वायु प्रदूषण घटाने के साथ ही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर भी लगाम लगा सकता है।

भारत में ई-वाहन पोर्टल पर पिछले तीन सालों में लगभग 5,17,322 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जबकि इनमें से लगभग 1,04,806 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन सिर्फ 2021 में हुआ है। देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, भारी उद्योग मंत्रालय ने 2015 में (हाइब्रिड और) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (FAME India) योजना शुरू की है।  केंद्र ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहल  भी की है। मई 2021 में, केंद्र ने बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए देश में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) के निर्माण के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी । केंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST भी 12% से घटाकर 5% कर दिया है। इससे पहले, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने घोषणा की थी कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को हरी लाइसेंस प्लेट दी जाएगी और उन्हें परमिट लेने की जरूरत नहीं होगी।

इलेक्ट्रिक गाड़ी में किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार  एक डीजल या पेट्रोल गाड़ी की तुलना में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी के सड़क पर चलने से लगभग 1.5 मिलियन ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है। इस कमी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि लंदन से बार्सिलोना की चार रिटर्न फ्लाइटों के उड़ने से इतने कार्बन का उत्सर्जन होता है। नीति आयोग की “India’s Electric Mobility Transformation रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां, 40 फीसदी बस, और 80 फीसदी तक दो पहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे। इससे CO2 उत्सर्जन में लगभग 846 मिलियन टन की कमी आएगी। वहीं इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलते लगभग 474 मिलियन टन तेल की बचत होगी जिसकी कीमत लगभग 207.33 बिलियन डॉलर होगी।

यानी एक बात साफ़ है की इलेक्ट्रिक वाहनों के देश में आ जाने से न सिर्फ प्रदूषण ख़त्म होगा बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी इसकी वजह से गजब के सुधार होने की उम्मीद की जा सकती  है भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक भारत में हाल ही में देखा गया है की भारत सरकार पर्यावरण को लेकर काफी चिंतित नज़र आ रही है और यही कारण है की सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में जल्द से जल्द उतारने की कोशिश कर रही है अगर हम पूरी तरह से परिवहन सेवाओं को इलेक्ट्रिक कर सके तो प्रदूषण रोकने में ये एक क्रांतिकारी कदम होगा बढ़ते प्रदुषण और अब इलेक्ट्रिक वाहनों के चलन पर हम कुछ आंकड़े और अध्ययन इस लेख में आपको बताने वाले 

दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन शहर भारत के हैं। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के लोग खतरनाक वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को दूर करने में इलेक्ट्रिक वाहनों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बढ़ता इस्तेमाल वायु प्रदूषण घटाने के साथ ही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर भी लगाम लगा सकता है। भारत में ई-वाहन पोर्टल पर पिछले तीन सालों में लगभग 5,17,322 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जबकि इनमें से लगभग 1,04,806 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन सिर्फ 2021 में हुआ है। देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, भारी उद्योग मंत्रालय ने 2015 में (हाइब्रिड और) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (FAME India) योजना शुरू की।  

केंद्र ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहल की है। मई 2021 में, केंद्र ने बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए देश में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) के निर्माण के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी गई। केंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST भी 12% से घटाकर 5% कर दिया है। इससे पहले, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने घोषणा की थी कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को हरी लाइसेंस प्लेट दी जाएगी और उन्हें परमिट लेने की जरूरत नहीं होगी।

इलेक्ट्रिक गाड़ी में किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। एक रिपोर्ट के एक डीजल या पेट्रोल गाड़ी की तुलना में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी के सड़क पर चलने से लगभग 1.5 मिलियन ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है। इस कमी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि लंदन से बार्सिलोना की चार रिटर्न फ्लाइटों के उड़ने से इतने कार्बन का उत्सर्जन होता है। नीति आयोग की “India’s Electric Mobility Transformation"  रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां, 40 फीसदी बस, और 80 फीसदी तक दो पहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे। इससे CO2 उत्सर्जन में लगभग 846 मिलियन टन की कमी आएगी। वहीं इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलते लगभग 474 मिलियन टन तेल की बचत होगी जिसकी कीमत लगभग 207.33 बिलियन डॉलर होगी। यानी एक बात साफ़ है की इलेक्ट्रिक वाहनों के देश में आ जाने से न सिर्फ प्रदूषण ख़त्म होगा बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी इसकी वजह से गजब के सुधार होने की उम्मीद की जा सकती।