भरूच: कुकिंग गैस से भी महंगा है यहां पानी

Author:आईबीएन-7
Source:आईबीएन-7


भरूच। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन गुजरात का एक शहर ऐसा भी है जहां पीने के पानी की कीमत कुकिंग गैस से भी ज्यादा है। बदइंतजामी का आलम ये कि इतना महंगा होने के बावजूद ये पानी पीने तो क्या घरेलू इस्तेमाल के लायक भी नहीं है। ये मामला है गुजरात के भरूच जिले का और पानी की इस बेहिसाब कीमत के खिलाफ लड़ रहे हैं सिटिज़न ज़र्नलिस्ट रमेश पटेल।

रमेश पटेल भरूच के अंकलेश्वर शहर स्थित जीआईडीसी इलाके में रहते हैं। उनके इलाके में जो समस्या है उसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। जीआईडीसी की कॉलोनी में कुकिंग गैस से भी ज्यादा मंहगा दाम पीने के पानी का है। इस अन्याय के खिलाफ रमेश पिछले 12 साल से लड़ रहे हैं लेकिन इस समस्या का हल निकालने में प्रशासन आज तक नाकामयाब रहा है।

एशिया की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी जीआईडीसी में लोगों की सबसे बड़ी समस्या है पीने का पानी। GIDC इस इलाके में जो पानी सप्लाई करती है उसकी मासिक कीमत 240 रुपए है। जबकि अंकलेश्वर नगरपालिका उससे कहीं ज्यादा गुणवत्ता वाला पानी 41 रुपए वार्षिक कीमत पर देती है। GIDC से सप्लाई होने वाला पानी बेहिसाब मंहगा होने के बावजूद न पीने लायक है और न घरेलू इस्तेमाल के लायक।

पानी गंदा होने की वजह से GIDC के अधिकतर लोग निजी कंपनियों से मिनिरल वॉटर खरीद कर पीने को मजबूर हैं। यही वजह है कि यहां हर इलाके में पानी का अलग दाम है।

सवाल ये कि GIDC जो पानी देता है वो इतना महंगा क्यों है।

दरअसल GIDC मिलने वाले पानी को फिल्ट्रेशन प्लांट के जरिये शुद्ध करती है और फ़िर उसे घरों तक पहुँचाती है। यही नहीं GIDC से मिल रहा पानी इतना खारा है कि वो पीने के काम में नही आ सकता।

रमेश ने एक NGO की मदद से इस पानी का हार्डनेस टेस्ट करवाया। इससे पता चला की यह पानी स्वास्थ के लिए हानिकारक है और इस से पथरी, जोड़ों में दर्द और दांत में दर्द, कैल्शियम की कमी और कई बीमारियाँ हो सकती हैं।

सरकारी दस्तावेजों से मिले आंकडे़ साफ तौर पर बताते हैं की इलाके के लोगों ने अब GIDC का पानी पीने के उपयोग में लाना बंद कर दिया है। पानी की हकीकत जानते हुए भी GIDC लोगों को यह पानी चौगुने दाम में दे रही है।

भरूच जिला उद्योग केन्द्र से मिले आंकड़ों के अनुसार GIDC इलाके में तीन निजी वॉटर कंपनियां हैं। इन कंपनियों ने साल 2007 में लगभग हर महीने 6660 लीटर पानी GIDC में बेचा है। रमेश खुद GIDC में सिविल इंजीनियर रह चुके हैं। सरेआम चल रही इस लूट के खिलाफ वो पिछले 12 साल से लड़ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की। उनसे कई बार मिले लेकिन GIDC इस बारे में कुछ नहीं किया।

रमेश ने गुजरात के मुख्यमंत्री तक इस बात को पहुंचाया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने भी इस बात को ध्यान में नहीं लिया। रमेश एक बार फिर GIDC के अफसरों के पास गए ये जानने कि पानी की इस समस्या को लेकर अधिकारी क्या कर रहे हैं।

मालूम हो कि 60 वर्ष की उम्र में रमेश GIDC के खिलाफ कई मोर्चों पर लड़ रहे हैं। GIDC ने अब तक करोड़ों रुपए लोगों से वसूल लिए हैं। लेकिन रमेश कहते हैं कि उन्हें चाहे किसी भी हालातों से गुजरना पड़े लेकिन वो कभी इन मोटी चमड़ी के अधिकारियों के सामने झुकने वाला नहीं।