'कैच द रेन' से खत्म होगी जल संकट की समस्या

Author:देव चौहान

विश्व जल दिवस पर देश  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानी पर अपने विचार रखे उन्होंने कहा कि   बढ़ती आबादी  के साथ साथ पानी की किल्लत और भी  बढ़ रही है आंकड़े बताते है की  27 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल रोज़ाना नहाने और शौचालय में किया जाता है वही भारत में औसतन  एक व्यक्ति हर रोज  45 लीटर पानी खर्च करता है और सबसे बड़ी चौकाने वाली बात तो ये है की देश की 16 करोड़  आबादी के पास पीने का स्वच्छ पानी   उपलब्ध नहीं है प्रधानमंत्री मोदी  ने कहा की अगर पानी का इसी तरह अतिक्रमण होता रहा तो साल 2050  तक भारत में 27 शहर ऐसे होंगे जहाँ पीने के पानी की  किल्लत होगी   पानी पैसो से कई ज्यादा बेशकीमती है और इसका सरंक्षण बेहद जरूरी है पानी के संरक्षण  का काम बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था   लेकिन नहीं हुआ और पानी के सरंक्षण के लिए कही न कही कमी रह गई अगर हमने पानी का दोहन नहीं  रोका तो आने वाले समय में हमें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़  सकता है।  

चलिए अब हम आपको बताते  कौनसे राज्य और शहर है जिनमें आने वाले समय मे पानी   का संकट विकराल रूप धारण कर सकता हैं , अमृतसर पुणे,कोलकाता, बेंगलुरू,  मुंबई कोझिकोड विशाखापत्तनम,  वडोदरा लुधियाना, जालंधर, धनबाद, भोपाल, ग्वाक्लियर ,सूरत ,दिल्ली, अलीगढ, लखनऊ ,कानपूर ,ये वो शहर है जो देश के लिए चिंता का विषय है  आपको बता दे की भारत पानी के इस्तेमाल  करने की कतार में  दूसरे नंबर पर आता है अब हम आपको वो शहर और देश बताते है जिनमें भारत के बाद जल संकट सबसे ज्यादा गहराने वाला है  ये शहर और देश है। ...मिश्र का अलेक्सेंड्रिआ, सऊदी अरब मक्का तोंगशाम चीन, बीजिंग चीन ,इंडोनेशिया , दक्षिण अफ्रीका का जोहानेसबर्ग, इस्तांबुल, हांगकांग  ब्राज़ील का रिओ डी जिनेरिओ   आपको बता दे की इन तमाम शहरो में और देशो में पानी को बचाने की पहल 90 के दशक से हो रहे है लेकिन वो प्रयास कितने सफल हुए है आंकड़े आपके सामने है विश्व जल दिवस पर पानी को सरंक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ''कैच द रेन'  कैंपेन की शुरुआत की। 

इस अभियान को मानसून की शुरुआत से पहले और उसके खत्म होने के बीच 30 मार्च से 30 नवंबर के बीच चलाया जाएगा. जमीनी स्तर पर जल संरक्षण में जन भागीदारी के लिए इस अभियान को जन आंदोलन के रूप में शुरू किया जाएगा. इसका मकसद बारिश के पानी को बचाने और संरक्षित करने के लिए लोगों को आगे लाना है.इस कैंपेन से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों को सूखे से राहत मिलेगी.पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसकी शुरुआत की.विश्व जल दिवस के उपलक्ष में  पीएम मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बीच केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, नदियों को आपस में जोड़ने के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना का पहला प्रोजेक्ट है।

भारत सरकार और प्रधानमंत्री द्वारा किए  गए इस प्रयास की वीडियो कॉन्फ्रेंस में मौजूद सभी लोगों  ने प्रशंसा की और आने वाले वक्त में जल संरक्षण पर गंभीरता से काम करने की प्रतिबद्धता भी दिखाई।