छिन पुरवैया छिन पछियाँव

Author:घाघ और भड्डरी

छिन पुरवैया छिन पछियाँव। छिन छिन बहै बबूला बाव।।
बादर ऊपर बादर धावै। तबै घाघ पानी बरसावै।।


शब्दार्थ- छिन-छिन – क्षण-क्षण। बबूला बाव – बंवडर, भँवर की तरह घूमती हवा

भावार्थ- यदि क्षण में पुरवा एवं क्षण में पछुवा हवा चले, बार-बार बंवडर उठे तथा बादल के ऊपर बादल दौड़ने लगें तो घाघ कहते हैं कि पानी अवश्य बरसेगा।

इसका एक अन्य रूप भी मिलता है-

खन पुरवैय खन पछियाँव। खन खन बहै बबूरा बाव।।
जौ बादर बादर माँ जाय। घाघ कहै जल कहा समाय।।


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