छोटे भूकम्पों का तात्पर्य (Small earthquakes implies)

Author:पीयूष रौतेला
Source:आपदा प्रबन्धन विभाग, उत्तराखण्ड शासन का स्वायत्तशासी संस्थान, फरवरी 2017

अब तक हम सभी जान चुके हैं कि भूखण्डों की सापेक्षीय गति में अन्तर के कारण इनके छोर पर निरन्तर जमा हो रही ऊर्जा ही भूकम्प का कारण है। ऐसे में यह विचार कि यदि इस ऊर्जा का सुरक्षित निस्तारण हो जाये तो भूकम्प का खतरा कम हो जायेगा औचित्यपूर्ण है। शायद आपने भी कभी इस बारे में ऐसा ही कुछ सोचा हो।

इसी तर्क को आधार बना कर कई बार छोटे भूकम्पों को क्षेत्र में जमा हो रही ऊर्जा को अवमुक्त करने में सहायक बताते हुये इनकी तुलना प्रेशर कुकर के सेफ्टी वाल्व से कर दी जाती है और छोटे भूकम्पों के आते रहने से बड़े भूकम्प के खतरे के कम होने से सम्बंधित तर्क दे दिये जाते हैं। शायद भूकम्प के परिमाण को नापने वाले लघुगणकीय पैमाने को ठीक से न समझ पाना इन तर्कों का कारण हो।

यह सच है कि बड़े भूकम्पों की ही तरह छोटे भूकम्प भी किसी क्षेत्र में भूगर्भीय हलचलों के कारण जमा हो रही ऊर्जा को अवमुक्त करते हैं, परन्तु इन छोटे भूकम्पों द्वारा अवमुक्त की गयी ऊर्जा का परिमाण हमारी सोच से कहीं ज्यादा कम होता है।

जैसा कि हम जानते हैं ‘क’ परिमाण के भूकम्प में अवमुक्त होने वाली ऊर्जा ‘क-1’ परिमाण के भूकम्प में अवमुक्त होने वाली ऊर्जा का 31.6 गुना होती है। ऐसे में किसी भी स्थान पर आसन्न 8.0 परिमाण के भूकम्प के खतरे को कम करने के लिये 7.0 परिमाण के 32 या फिर 6.0 परिमाण के लगभग 1000 भूकम्पों की आवश्यकता होगी। अगर कम परिमाण के इतने भूकम्प आ जाते हैं तो तब शायद बड़े भूकम्प का खतरा निश्चित ही कम हो जायेगा परन्तु वास्तविकता में छोटे भूकम्प ज्यादा तो आते हैं पर इतने भी ज्यादा नहीं कि इनसे बड़े भूकम्प का खतरा कम हो पाये।

अतः छोटे भूकम्पों के आते रहने से बड़े भूकम्प का खतरा कम होने की धरणा गलत व भ्रामक है।

छोटे भूकम्पों से बड़े भूकम्प का खतरा तो निश्चित ही कम नहीं होता परन्तु यह छोटे भूकम्प हमें अवश्य ही बड़े भूकम्प की याद दिलाते हैं और तैयार रहने की चेतावनी देते हैं।

 

कहीं धरती न हिल जाये

(इस पुस्तक के अन्य अध्यायों को पढ़ने के लिए कृपया आलेख के लिंक पर क्लिक करें)

क्रम

अध्याय

1

पुस्तक परिचय - कहीं धरती न हिल जाये

2

भूकम्प (Earthquake)

3

क्यों आते हैं भूकम्प (Why Earthquakes)

4

कहाँ आते हैं भूकम्प (Where Frequent Earthquake)

5

भूकम्पीय तरंगें (Seismic waves)

6

भूकम्प का अभिकेन्द्र (Epiccenter)

7

अभिकेन्द्र का निर्धारण (Identification of epicenter)

8

भूकम्प का परिमाण (Earthquake Magnitude)

9

भूकम्प की तीव्रता (The intensity of earthquakes)

10

भूकम्प से क्षति

11

भूकम्प की भविष्यवाणी (Earthquake prediction)

12

भूकम्प पूर्वानुमान और हम (Earthquake Forecasting and Public)

13

छोटे भूकम्पों का तात्पर्य (Small earthquakes implies)

14

बड़े भूकम्पों का न आना

15

भूकम्पों की आवृत्ति (The frequency of earthquakes)

16

भूकम्प सुरक्षा एवं परम्परागत ज्ञान

17

भूकम्प सुरक्षा और हमारी तैयारी

18

घर को अधिक सुरक्षित बनायें

19

भूकम्प आने पर क्या करें

20

भूकम्प के बाद क्या करें, क्या न करें

 

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