देहरादून की जनता पी रही दूषित पानी

Author:हिमांशु भट्ट

फोटो - Hindustan

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना चल रह रही है, लेकिन विकास की इस जद्दोजहद में साफ पानी नसीब न होने के कारण देहरादून की जनता पानी के साथ विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी गटक रही है। जिसकी पुष्टि हाल ही में बीआइएस (भारतीय मानक ब्यूरो) द्वारा देश के 21 शहरों के पानी की गुणवत्ता की जांच में की गई थी, जिसमें देहरादून 18वे स्थान पर रहा था, लेकिन बीआइएस ने पानी की गुणवत्ता के आंकड़े जारी कर जल संस्थान के वादों और कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। आंकड़ों के अनुसार देहरादून के पानी में सीवरजनित कोलीफार्म और ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। जिससे लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने का खतरा मंडरा रहा है।

बीआइएस ने देहरादून के धर्मपुर, नेहरु काॅलोनी, सुभाष रोड, रेसकोर्स, चुक्खूवाला, अजबपुर कलां, बंजारावाला, मोहकमपुर, नेहरु ग्राम और बलबीर रोड से पानी के नमूने लेकर इन्हें दस मानकों पर परखा था। जिसमें धर्मपुर, नेहरु काॅलोनी, सुभाष रोड, रेसकोर्स, चुक्खूवाला, अजबपुर कलां का पानी प्रमुख सात पैरामीटरों पर खरा नहीं उतरा, जबकि बंजारावाला का छह, मोहकमपुर का पांच, नेहरु ग्राम का चार और बलबीर रोड पर 3 पैरामीटरों पर पानी मानकों पर खरा नहीं उतरा। यहां पानी में कोलीफार्म, ई-कोलाई बैक्टीरिया, टीडीएस (टोटल डिजाॅल्वड साॅलिड), टोटल हार्डनेस, टोटल एल्कलाइनिटी, मैग्नीशियम और कैल्शियम की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई।

दरअसल पानी में टीडीएस की अधिकतम मात्रा 300 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा अधिक न होने पर 1500 टीडीएस वाला पानी भी पीने योग्य होता है, लेकिन देहरादून के पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम दोनों ही तत्व मानकों से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। कैल्शियम बाईकार्बोनेट की अधिकतम सीमा 75 मिलीग्राम और मैग्नीशियम बाईकार्बोनेट की अधिकमत सीमा 30 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। जिससे पानी की हार्डनेस बढ़ गई है और पानी पीना बीमारियों को न्यौता देने के समान हो गया है। इससे अल्जाइमर, मधुमेह, एसिडिटी, पथरी, समय से पहले त्वचा पर झुर्रिया आना, त्वचा रोग, दिल की बीमारी, अस्थमा आदि होने की संभावना बनी रहती है।

कोलीफाॅर्म भी स्वास्थ्य के लिए घातक है। ये बैक्टीरिया गोबर और पानी में पाया जाता है। अन्य हानिकारक तत्वों की पानी में एक सीमा निर्धारित की गई है, निर्धारित सीमा से अधिक होने पर खतरा बढ़ जाता है, लेकिन कोलीफाॅर्म के लिए कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है, क्योंकि पानी में कोलीफाॅर्म की मात्रा शून्य होनी चाहिए। पानी में इसकी मात्रा बढ़ने से पेट के रोग, डायरिया, हेपेटाइटिस, पीलिया आदि बीमारिया होने का खतरा रहता है, लेकिन देहरादून के पानी में कोलीफाॅर्म पाया गया है, जिससे ये साफ हो गया है कि पानी में गोबर या सीवर मिल रहा है। तो वहीं देहरादून के पानी में पाया गया टोटल एल्कलाइनिटी (कुल क्षारीयता) यानी पानी में पीएच वैल्यू, जो 6.5 से 7.5 के बीच होनी चाहिए, लेकिन इसकी मात्रा भी पानी में अधिक पाई गई है। इसके बढ़ने से अल्सर होने की संभावना अधिक होती है तथा त्वचा और बाल संबंधी रोग भी होते हैं।

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