दून स्मार्ट सिटी से आगे अब स्मार्ट उत्तराखण्ड का इरादा

Author:अमर उजाला
Source:अमर उजाला, 23 मार्च, 2018

उत्तराखण्ड सरकार अब राज्य के शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रान्त को स्मार्ट व एडवांस बनाने पर विचार कर रही है। इस बार के बजट में राज्य सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर राज्य के हर गाँव, कस्बों और शहरों पर फोकस किया है और उन तक हर मूलभूत सुविधा पहुँचाने की कोशिश में है। जल्द ही उत्तराखण्ड को मेट्रो रेल परियोजना मिल सकने की उम्मीद है। बजट में सभी वर्ग के बारे में ध्यान रखा गया है।

राज्य सरकार ने देहरादून स्मार्ट सिटी से आगे निकलकर अब उत्तराखण्ड स्मार्ट स्टेट का इरादा जाहिर किया है। न सिर्फ देहरादून, बल्कि तमाम शहरों में विकास की रफ्तार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिये बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने बजट को पेश करते हुए शहरों की सूरत बदलने का संकल्प प्रकट किया है। दून में स्मार्ट सिटी से लेकर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की सरकार ने बात की है। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिये 86 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है।

बजट में सरकार ने दून को स्मार्ट सिटी घोषित किये जाने का जिक्र करते हुए अब केन्द्र सरकार की मदद से इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने की बात कही है। इसके अलावा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिये बजट की व्यवस्था करने के बाद यह भी साफ हो गया है कि इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर सरकार तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश में है। भले ही यह प्रोजेक्ट शुरुआती तौर पर तेजी नहीं पकड़ पाया हो। 11 जिलों में जिला विकास प्राधिकरणों के गठन को सरकार ने सुनियोजित विकास के लिये एक बड़े कदम के तौर पर पेश किया है। विभिन्न शहरों में महायोजना के लिये सर्वे के काम को आगे बढ़ाने की मंशा भी सरकार ने बजट में प्रदर्शित की है।

पावर सेक्टर का होगा कायाकल्प


प्रदेश सरकार का ऊर्जा क्षेत्र पर खासा जोर है। ऊर्जा क्षेत्र के लिये बजट में 319.94 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। ऊर्जा की परियोजनाओं को मजबूती प्रदान करने के लिये 1600 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति जल्द प्राप्त होने की सम्भावना है।

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिये दीन दयाल उपाध्याय ग्राम योजना के अन्तर्गत 94 अविद्युतीकृत गाँवों में 63 का विद्युतीकरण किया जा चुका है। दस हजार से कम आबादी वाले 36 छोटे शहरों में इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत कार्य शुरू हो चुका है, जिसे अक्टूबर 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के पूरी होने की स्थिति में लाइन लॉस में कमी आयेगी। इससे छोटे शहरों में विद्युत आपूर्ति में सुधार होगा।

बिजली उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये जल विद्युत परियोजनाओं की राह आसान करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वर्तमान में उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) की 1289.35 मेगावाट की परियोजनाएँ चल रही हैं।

150.75 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इसमें 120 मेगावाट क्षमता वाली व्यासी परियोजना का 70 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के अन्तर्गत लगभग 3.5 लाख घरों में बिजली का कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश सरकार की योजना सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति उपलब्ध कराने की है।

ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियाँ


1. प्रदेश के सभी भवनों में ऊर्जा बचत के लिये एक्यूपेंसी सेंसर लगाकर 15 से 20 फीसदी बिजली की बचत की गई।
2. स्ट्रीट लाइट के लिये एलईडी आधारित योजना शुरू।
3. देहरादून नगर निगम क्षेत्र में 5200 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गई।
4. उजाला योजना के अन्तर्गत 44 लाख एलईडी बल्ब का वितरण।
5. 2020 तक हरिद्वार और देहरादून के सभी सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होंगे।
6. यूजेवीएनएल ने वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र में 6.466 मेगावाट की सोलर परियोजनाएँ शुरू की।

2020 तक डिजिटल होंगे सभी राजस्व न्यायालय


प्रदेश सरकार ने 2018-19 के बजट में राजस्व विभाग के कामकाज को चुस्त-दुरुस्त बनाने पर जोर दिया गया है। इज ऑफ डूईंग के अन्तर्गत भूमि के उपयोग से सम्बन्धित अनुमति ऑनलाइन दिये जाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। कैडस्ट्रल मैप्स का डिजिटाइजेशन योजना के अन्तर्गत पायलट जनपद पौड़ी गढ़वाल में 95 फीसदी नक्शों का एवं जनपद अल्मोड़ा में 75 प्रतिशत नक्शों की स्कैनिंग का कार्य किया जा चुका है। 2020 तक राजस्व न्यायालयों का पूर्ण डिजिटाइजेशन कर लिया जायेगा।

राज्य में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मार्डनाइजेशन प्रोग्राम अन्तर्गत चयनित अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल के कैडस्ट्रल नक्शों को डिजिटाइज्ड करने के लिये निविदा जारी कर दी गई है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर के 50 हरिद्वार 124 और नैनीताल जनपद के दो गाँवों में चकबन्दी की प्रक्रिया चल रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि के जोतों का एकीकरण, भू-सुधार, जैविक कृषि तथा पलायन को दृष्टिगत रखते हुए पर्वतीय चकबन्दी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 2016 में निहित प्रावधानों के अनुसार तीन ग्रामों (ग्राम पंचूर, ग्राम औणी तथा खैरासैंण) में पर्वतीय चकबन्दी का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।

बजट में खास


1. चारधाम परियोजना के लिये 824.60 किलोमीटर में से 700.45 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
2. चारधाम परियोजना के लिये केन्द्र ने प्रतिकर के रूप में 264.93 करोड़ में से 207.40 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है।
3. दस करोड़ रुपये की पूँजी निवेश वाले उद्योग के लिये भूमि क्रय करने का अधिकार जिलाधिकारियों को प्रदान किया गया है।

खनन से 700 करोड़ राजस्व हासिल करने का लक्ष्य


खनन से प्राप्त होने वाला राजस्व प्रदेश सरकार की आमदनी का मुख्य स्रोत है। चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में फरवरी माह तक खनन से 323 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो वित्त वर्ष 2016-17 के मुकाबले 23 फीसदी है। अगले वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान खनन से 700 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विभाग ने जनवरी 2018 तक 3185 खनन के क्षेत्रीय निरीक्षण से सम्बन्धित प्रकरणों का निस्तारण किया है। खनन सर्विलांस योजना के अन्तर्गत अवैध खनन/अवैध परिवहन की रोकथाम हेतु मैनुअल परिवहन प्रपत्र के स्थान पर ‘ई-रवन्ना प्रणाली’ लागू कर दी गई है। इस कार्य पर नजर रखने के लिये मुख्यालय स्तर पर 45 एमबीपीएस का इंटरनेट कनेक्शन वाला कंट्रोल रूम स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।

राज्य में रिक्त उप खनिज क्षेत्रों के आवंटन के लिये ई-निविदा/सह ई-नीलामी के माध्यम से की जा रही है। इसके लिये उत्तराखण्ड उप खनिज परिहार संशोधन नियमावली-2017 बनाई गई है। खनन होने वाले क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिये प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अन्तर्गत जिला खनिज न्याय का गठन कर दिया गया है।

राष्ट्रीय खनिज खोज न्याय (एनएमईटी) कोष में मुख्य खनिजों के खोज कार्य के लिये पट्टा धारकों से रॉयल्टी का दो फीसदी धनराशि/अंशदान जमा कराये जाने का प्रावधान कर दिया गया है। राज्य में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के मद्देनजर 700 करोड़ का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में औद्योगिक विकास विभाग हेतु 307.88 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

दून में चलेंगी सीएनजी बसें


राज्य के तीन जिले हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून में आगामी दो सालों में सीएनजी आधारित बसें संचालित करने की योजना है। इसका जिक्र बजट में किया गया है। इसके अलावा 2020 तक सड़क हादसों को आधा करने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं, राज्य में निजी क्षेत्र के सहयोग से बस अड्डों का निर्माण किया जायेगा। वहीं, रोडवेज बसों में जो बुजुर्ग जनों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, राज्य आन्दोलनकारियों को निःशुल्क बस यात्रा करता है, उसकी प्रतिपूर्ति की व्यवस्था भी बजट में की गई है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिये 241.13 करोड़ का प्रावधान बजट में किया गया है। इसके अलावा इस बजट में मेट्रो रेल परियोजना के लिये 86 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हवाई सेवा का होगा विस्तार


प्रदेश सरकार की योजना हवाई सेवा को बेहतर बनाकर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की है। दूरस्थ इलाकों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये क्षेत्रीय सम्पर्क योजना (उड़ान) के अन्तर्गत पिथौरागढ़, गौचर, चिन्यालीसौड़, धारचूला, अल्मोड़ा, नैनीताल और रामनगर के लिये सस्ती हवाई सेवा शुरू की जायेगी। इसके लिये कम्पनी का चयन भी हो चुका है। सरकार ने 2018-19 के बजट में उड़ान योजना के लिये 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। हवाई सेवा में तेजी लाने के लिये प्रदेश में 24 विभागीय और एडीबी के सहयोग से 27 हेलीपैड का निर्माण किया गया है। इन हेलीपैडों से उड़ान योजना के अन्तर्गत हेली सेवा शुरू की जायेगी।

प्रदेश सरकार ने बजट में उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के लिये 18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। राज्य में पर्यटन के विकास के लिये देहरादून में सहस्त्रधारा हेलीपैड से श्री केदारनाथ दर्शन, हेमकुंड साहिब दर्शनयात्रा प्रारम्भ की गई है। यात्रा सीजन के दौरान गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा से केदारनाथ के लिये हेली सेवा शुरू की जायेगी। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिये हेलीसेवा शुरू की जायेगी, जिसका टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है।

इस साल डेढ़ लाख विधवाओं को पेंशन देगी सरकार


प्रदेश सरकार इस साल डेढ़ लाख महिलाओं को पेंशन देगी। इसके अलावा 475000 वृद्धजनों, 75000 दिव्यांगों को पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। वृद्धावस्था पेंशन के लिये सरकार ने 86.24 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि विधवा पेंशन पर वह 13.33 करोड़ रुपये खर्च करेगी। स्वतंत्रता सेनानियों व आश्रितों की पेंशन पर वह 13.10 करोड़ रुपये व दिव्यांग पेंशनधारियों पर 1.58 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। एससी व एसटी के स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत वृद्धावस्था किसान पेंशन के लिये 130 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

बजट 2018-19 में खास


1. ई-विधानसभा के लिये किया गया बजटीय प्रावधान।
2. अज्ञात शवों के दाह संस्कार के लिये धनराशि।
3. माउंट एवरेस्ट पर पुलिस पर्वतारोहण दल भेजने का भी बजट देगी सरकार।
4. भोजन माताओं को वर्दी के लिये मिलेंगे तीन करोड़।
5. उत्तराखण्ड में आयुष शोध संस्थान स्थापित होगा।
6. पेयजल परियोजना के लिये मिलेंगे 40 करोड़ रुपये।
7. एनडीए, आईएमए व ओटीए के प्रशिक्षण की नई योजना।
8. नैनीताल झील के पुनर्जीवन को मिलेंगे पाँच करोड़।
9. ग्रोथ सेंटर की स्थापना के लिये 15 करोड़ का प्रावधान।
10. ऋषीकेश में चारधाम यात्रा के लिये जाने वाले यात्रियों के रजिस्ट्रेशन ऑफिस व ट्रांजिट कैम्प के लिये सात करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
11. ऋषीकेश में स्वामी विवेकानंद अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन एवं वेलनेस सिटी के निर्माण के लिये प्रावधान।
12. होम स्टे पॉलिसी के लिये 20 करोड़ का प्रावधान।
13. श्रीनगर गढ़वाल में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय के भवन निर्माण को धनराशि का प्रावधान।
14. पेयजल विभाग में 975 करोड़ की योजना।

9. करोड़ों की योजनाओं पर है विकास का दारोमदार


वित्त मंत्री ने बजट में कई ऐसी योजनाओं का जिक्र किया है, जिनमें केन्द्र और विश्व बैंक से सैद्धान्तिक सहमति मिली है। इन योजनाओं पर प्रदेश के विकास का काफी दारोमदार है। सरकार इनके भरोसे तरक्की की नई इबारत लिखने का अरमान पाले हुए है। पेयजल की वाह्य साहयतित योजना के तहत 840 करोड़ की योजना स्वीकृति हो चुकी है। विश्व बैंक सहायित 975 करोड़ की योजना को भी मंजूरी मिली है। 600 करोड़ रुपये उसे एमएसएमई योजना के तहत मिलने हैं, जिस पर सैद्धान्तिक स्वीकृति मिल चुकी है।

आपदा प्रबन्धन के तहत वाह्यसाहयतित योजना में 650 करोड़ रुपये मिलने हैं। शहरी विकास को वाह्य सहायतित योजना में 1500 करोड़ मिलने हैं। इनके अलावा लोनिवि को 2000 करोड़ और सिंचाई विभाग की वाह्य सहायतित परियोजना के तहत 1000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।

केएफडब्ल्यू परियोजना के लिये 40 करोड़ पर मुहर


सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में सीवर सिस्टम को और मजबूत करने के लिये केएफडब्ल्यू परियोजना में 40 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। हालाँकि जर्मनी के सहयोग से चलने वाली यह परियोजना 840 करोड़ की है। मगर सरकार ने प्रारम्भिक तौर पर इसके लिये बजट का मुँह खोल दिया है। इस परियोजना में हरिद्वार, ऋषिकेश, तपोवन, मसूरी और देहरादून जैसे शहरों में सीवर सिस्टम पर काम होगा।

कई शहरों के साथ होगा संस्कृति का कनेक्शन


शहरों के साथ संस्कृति का कनेक्शन जोड़ने के लिये बजट में सरकार ने कई योजनाओं को सामने रखा है। टिहरी शहर में गंगा पर आधारित संग्रहालय निर्माण की बजट भाषण में बात की गई है। उदयशंकर नृत्य नाटक अकादमी अल्मोड़ा परिसर में संग्रहालय की भी बात कही गई है। देहरादून में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के निकट संस्कृति ग्राम और पिथौरागढ़ में अवस्थित किले में संग्रहालय की स्थापना सरकार करेगी।

बजट की सरगम


1. 32.9 प्रतिशत आय होती है स्वयं का कर एवं राजस्व मद से
2. 18.2 प्रतिशत केन्द्रीय करों में राज्यांश है आय का अहम जरिया
3. 7.6 प्रतिशत करेत्तर राजस्व भी अहम