एस्टोल प्रोजेक्ट से बुझेगी 4.5 लाख लोगों की प्यास

Author:देव चौहान

किसी  भ देश के विकास में वहां की  बुनियादी चीज़ो का ध्यान रखा जाना अतिआवशयक है  जैसे शिक्षा स्वास्थ्य  सड़क और इन सबसे महत्वपूर्ण जल की आपूर्ति हो,  यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना हर घर जल और हर घर नल जोर शोरो से इस वक़्त पूरे भारत में चल रही है लेकिन हाल ही में पानी के क्षेत्र में गुजरात सरकार ने एक मील का पठार हासिल किया है इस मील के पत्थर का नाम है एस्टोल प्रोजेक्ट 

इस योजना के  तहत वलसाड जिले के आदिवासी गांवों और बस्तियों में रहने वाले 4.50 लाख लोगों को नल का पानी मुहैया कराया जा रहा है हालही में प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना का 10  जून  2022 को  उद्धघाटन किया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज 21वीं सदी के आधुनिक भारत की विकास यात्रा में एक शानदार अध्याय जुड़ा है,

इस परियोजना की सबसे ख़ास बात ये है कि ये इंजीनियरिंग के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित हो रही है क्योंकि  इस पानी को 200 मंजिला इमारत यानी करीब 1,875 फीट की ऊंचाई तक पहुंचाया गया है जो की एक चुनौती थी लेकिन अब इस पानी से गुजरात के वलसाड जिले के आदिवासी गांवों और बस्तियों में रहने वाले 4.50 लाख लोग इस परियोजना से लाभान्वित होंगे उन्हें अब अपनी जरूरतों के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा,आपको बता दे कि  धरमपुर और कपराडा के आदिवासी क्षेत्रों की जमीन कुछ ऐसी है कि यहां न तो बारिश के पानी का भंडारण किया जा सकता है और न ही भूजल को संग्रहित किया जा सकता है।

इसका कारण यह है कि अधिकांश भूमि पथरीली है और वर्षा जल का बहाव तीव्र गति से होता है।पथरीली जमीन और तेज बहाव के कारण केवल बरसात के मौसम में ही जलाशय भर पाते हैं और कुछ ही समय में सूख जाते हैं। 2018 में, राज्य सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पीने योग्य पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 586.16 करोड़ रुपये की लागत से एस्टोल परियोजना शुरू की थी जो अब धरातल पर उतर चुकी है।