हिमनदीय बेसिन से आने वाले जल प्रवाह पर ऋतु परिवर्तन के प्रभाव

Author:नीरज कुमार भटनागर, मनोहर अरोरा, राजदेव सिंह
Source:राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान
वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों के निरंतर बढ़ती मात्रा के परिणाम स्वरूप पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है। हिमनदों के द्रव्यमान, आयतन, क्षेत्रफल व लम्बाई में होने वाली कमी को स्पष्ट तौर पर निरंतर गर्म होती ऋतु का संकेतक माना जा सकता है। हिमनदों से आने वाला जल प्रवाह स्थानीय जल संसाधनों में महत्वपूर्ण योगदान करता है। इस प्रपत्र में गढ़वाल हिमालय में स्थित डोकरयानी हिमनद से अलग-अलग ऋतु परिवर्तन परिद्रश्यों में प्राप्त प्रवाह-अवधि वक्रों में परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है। दो हिम गलन वर्षो 1997 व 1998 हेतु हिमनद से प्राप्त प्रवाहों को एक कन्सेप्चुअल (Conceptual) निदर्श SNOWMOD द्वारा simulate किया गया है। तापमान में 1 से 3 डिग्री तक की वृद्धि मानी गयी है एवम् वर्षा में + 10 प्रतिशत का परिवर्तन माना गया है। प्रवाह-अवधि वक्रों का तीव्र ढाल यह इंगित करता है कि धारा प्रवाह सीधे तौर पर अपवाह से पूरित होता है एवम् बेसिन में भंडारन नगण्य है।

60 प्रतिशत निर्भरता (dependence) पर जो प्रवाह (3.2 m3/s) 1998 में प्राप्त होता था 20C तापमान वृद्धि करने पर वही प्रवाह 70 प्रतिशत निर्भरता पर प्राप्त होता है। 10 प्रतिशत वर्षा वृद्धि करने पर 80 प्रतिशत निर्भरता पर प्राप्त प्रवाह में 2 प्रतिशत वृद्धि होती है (1-5m3/s से 1.53 m3/s तक) वही 10 प्रतिशत वर्षा में कमी होने पर प्रवाह में 8 प्रतिशत (1.5 m3/s से 1.37 mw/s) ह्रास होगा।

जल प्रवाह की प्राप्ति पर तापमान की भूमिका वर्षा की तुलना में ज्यादा प्रभावी है। अल्प-प्रवाह स्थिति में वर्षा का प्रभाव स्थिति की अपेक्षा ज्यादा प्रभावशाली है।

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