इन्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के भूकम्प एवं भारत

Author:सुशील कुमार
Source:अश्मिका, जून 2012

11 अप्रैल, 2012 को इन्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में आये दो तीव्र भूकम्पों (M > 8.0) से दक्षिण भारत, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर तथा आस्ट्रेलिया तक भूकम्प के कम्पन महसूस किये गये। इन भूकम्पों का आकार 8.6 तथा 8.2 था। यह भूकम्प वाडिया भूविज्ञान संस्थान की सभी भूकम्प वेधशालाओं में अंकित किये गये। सुमात्रा में तीव्र भूकम्प 1833 से इतिहास में अंकित है। इसके बाद 2004, 2005, 2007, 2009 व 2010 में आये तीव्र भूकम्पों के कम्पन भारत तक महसूस किये गये थे। अप्रैल में आये भूकम्‍पों के कारण के विषय में जानें तो इस क्षेत्र में भारत/ऑस्ट्रेलिया प्लेट उत्तर-उत्तर पूर्व की दिशा में सुन्डा प्लेट के सापेक्ष 52 मिलीमीटर/साल की दर से गतिमान है। यह दोनों भूकम्प भारत/आस्ट्रेलिया प्लेट के समुद्री स्थल मंडल में नति लंबी दरार से उत्पन्न हुये थे और भारत/आस्ट्रेलिया तथा सुंडा प्लेट की प्लेट सीमा से क्रमश: 100 किमी तथा 200 किमी की दूरी पर थे।

Fig-1हालाँकि इन भूकम्पों से जानमाल की तो कोई हानि नहीं हुई परन्तु इन भूकम्पों के आकार देखते हुये तुरन्त सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई थी। लोगों को इन भूकम्पों से 2004 में आई भयानक सुनामी की याद ताजा हो गई थी जिसमें 14 देशों के दो लाख से अधिक लोग मारे गये थे। परन्तु इन भूकम्पों के उत्पन्न होने का कारण पता चलने के बाद 28 देशों में जारी सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई। 2004 में तीव्र भूकम्प का कारण जबरदस्त क्षेप भ्रंश था जिससे समुद्री तल का जो भाग ऊपरी प्लेट का भाग था, तेजी से ऊपर की तरफ गतिमान हुआ था और इससे भारतीय समुद्र में विशाल विनाशकारी लहरें उत्पन्न हुई थीं जिससे भारी तबाही मचाने वाली सुनामी ने कहर मचाया। इन हाल के भूकम्पों का कारण नति लंबी भ्रंश होने से समुद्री तल की दरारों में समान्तर गति हुई जिससे बहुत ही कम पानी विस्थापित हुआ और भारतीय समुद्र में विशाल लहरें उत्पन्न नहीं हुई और सुनामी वार्निंग की घोषणा भूकम्प के उत्पन्न होने के कुछ घंटो में वापस ले ली गई थी। इससे अधिकतम 80 सेमी की ऊँचाई की तंरगे ही उत्पन्न हुई जो सामान्यतः बहुत अधिक नुकसान नहीं पहुँचाती है।

Fig-2हिमालय क्षेत्र में कार्यरत वाडिया भूविज्ञान संस्थान की विभिन्न भूकम्प वेधशालाओं पर इन भूकम्पों को अंकित किया गया है एवं उन भूकम्पों के आंकड़ों से कम से कम समय में यह सुनिश्चित किया है कि इन भूकम्पों में से कौन सा भूकम्प सुनामी उत्पन्न करेगा एवं कौन से भूकम्प से सुनामी उत्पन्न नहीं होगी। इस विश्लेषण में सुनामी उत्पन्न करने वाले एवं सुनामी न उत्पन्न करने वाले भूकम्पों में विभेद करने हेतु वेवलेट ट्रांसफॉर्म तकनीक का प्रयोग किया गया है जोकि टाईम स्केल डोमेन में आवृत्ति की मात्रा पर आधारित है। पी-वेव ट्रेन के शुरुआती 4-5 मिनट के सीस्मोग्राम में आवृत्ति का विश्लेषण विभिन्न सुनामीजनित व नॉन सुनामीजनित भूकम्पों के लिये किया गया। वेवलेट ट्राँसफार्म तकनीक पर आधारित अध्ययन के मात्रात्मक सत्यापन के लिये सांख्यिकीय सार्थकता परीक्षण भी किया गया। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में आये ग्रेट भूकम्प (Mw = 8.6) (11 अप्रैल, 2012) 11 मार्च, 2011 को जापान के ग्रेट तोहुकू क्षेत्र में आये भूकम्प व अन्य के सीस्मोग्राम का विशेष विवरण अध्ययन में प्रयुक्त वैज्ञानिक पद्धति को स्पष्ट करने के लिये तालिका 1 में लिया गया है।

Fig-3इन सीस्मोग्राम की आवृत्ति सामग्री का अध्ययन किया गया और उच्चतर आवृत्ति पर ऊर्जा की मात्रा की गणना की गई। यह देखा गया कि 0.33 Hz (स्केल < 50) से ज्यादा की आवृत्ति पर सुनामी उत्पन्न करने वाले भूकम्प ऊर्जा की अर्थपूर्ण मात्रा प्रदर्शित नहीं करते हैं तथापि सुनामी न उत्पन्न करने वाले भूकम्पों के तरंगिका वर्णक्रम में ऊर्जा की महत्त्वपूर्ण मात्रा पाई जाती है। उपरोक्त तथ्य का सत्यापन फूरियर ट्रांसफॉर्म विश्लेषण से भी होता है।

इस वैज्ञानिक पद्धति के परीक्षण एवं तुलनात्मक विश्लेषण के लिये विभिन्न वैश्विक भूकम्पों का जोकि समुद्र के आंतरिक भाग में उत्पन्न हुए, का भी अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में प्रयुक्त तरीका द्रुत है और सुनामी चेतावनी जारी करने की परम्परागत पद्धतियों की समस्याओं का व्यवहारिक परिप्रेक्ष्य में निदान करता है।

Fig-4

 

तालिका : 1

वर्ष

माह

दिन

आकार

क्षेत्र

Max Ea

सुनामी स्थिति

2011

03

11

9.0

होन्‍शू

29

सुनामीजनित

2012

04

11

8.6

सुमात्रा

30

नॉन सुनामीजनित

2004

12

26

9.1

उत्‍तरी सुमात्रा का पूर्वी तट

39.8

सुनामीजनित

 

सम्पर्क


सुशील कुमार
वा. हि. भूवि. सं., देहरादून


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