जब पुरवा पुरवाई पावै

Author:घाघ और भड्डरी

जब पुरवा पुरवाई पावै।
झूरी नदिया नाव चलावै।।


भावार्थ- पूर्वा नक्षत्र में यदि पुरवैया हवा चले तो सूखी नदी भी नाव चलाने की स्थिति में पहुँच जाती है अर्थात् वर्षा खूब होती है और नदी में इतना अधिक पानी भर जाता है कि उस में नाव चलाई जा सकती है।