जल ही जीवन है

Author:पवन कुमार (भारती)
Source:जल चेतना तकनीकी पत्रिका, सितम्बर 2011

जल ही जीवन हैपानी से पैदा हुए हैं, पौधे जन्तु हर प्राणी।
बिन पानी ही छाई है, हर ग्रह पर वीरानी।।
हरी-भरी धरती, कहती पानी की अजब कहानी।
बिन पानी हो जाती है, जीवन की खत्म कहानी।
सत्तानवे प्रतिशत पानी को, खारे सागर ने घेरा है।
बाकी बचे में अधिकांश का, ग्लेशियर रूप में डेरा है।।
कुछ मात्रा भूजल, नदी और तालाबों में थी जानी।।
बिन पानी...

नदियों में जाता है पानी, ग्लेशियर की जुबानी।
इसी तरह से पृथ्वी पर, सन्तुलित रहता है पानी।।
बिन पानी...

अमीबा, सीपी कितने जन्तु, पानी में ही रहते हैं।
जल से बने जन्तु और पौधे, युग्लीना ऐसा कहते हैं।
पानी में रहती है, मछली जल की रानी।।
बिन पानी...

हो अगर कहीं तो यहीं है मुमकिन, जीवन की सम्भावनाएँ।
फिर ढूँढते हैं ऑक्सीजन, और बाकी आवश्यक दशाएँ।।
किसी ग्रह पर पानी, है जीवन की प्रथम निशानी।।
बिन पानी...

नदियों में गन्दे नाले डाले, झीलों में कचरा डाला।
उद्योगों में भी पीने का पानी, इस्तेमाल कर डाला।।
जानबूझकर बर्बाद कर रहे, क्यों मूरख अज्ञानी।।
बिन पानी...

न समझो नित संकुचित होते, जल भंडारों को अपार।
बढ़ती माँग फैलता प्रदूषण, संकट के आसार।।
पानी पर ही होगी, एक दिन दुनिया में खींचातानी।।
बिन पानी...

पवन कुमार “भारती”
चौहान भवन, विकास कालोनी, हरिद्वार

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