जल शोधन और पानी की गुणवत्ता

Author:admin
परिकल्पना: शोधन में उच्च प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पानी में अति सूक्षम कणों की मात्रा घटती है। कारण: तकनीक के इस्तेमाल के आधार पर पानी के विभिन्न स्रोतों का इस प्रकार क्रम बनाया जा सकता है। यह क्रम है तालाब, झील, झरना, नदी, खुला कुआं, बोर कुआं, पाइप जलापूर्ति, एक्वागार्ड और बिसलेरी जैसा बोतलबंद पानी। तकनीक का इस्तेमाल स्वास्थ्य पर बुरा असर डालने वाले कोलीफार्म जैसे अति सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा को बेहद कम करना है। यह देखना महत्वूर्ण है कि वास्तव में यह उद्देश्य पूरा हो भी पाता है या नहीं। कार्यप्रणाली: पीने के पानी के विभिन्न स्रोतों से पानी के नमूने इकट्ठा करें। पानी के नमूने घरों, होटलों, शहर की जल आपूर्ति लाइन, बोर कुएं, आदि से इकट्ठे किए जा सकते हैं। पानी में अति सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा के आकलन के लिए जल गुणवत्ता माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला से संपर्क करें। विभिन्न स्रोतों के नमूनों में सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा की तुलना करें। अगला कदम: किसी तकनीकी विशेषज्ञ की सलाह से शहरी जलापूर्ति एजेंसी, बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियों और एक्वागार्ड जैसे उपकरणों में पानी को साफ़ करने की प्रक्रिया की तुलना करें। आकलन करें कि पानी में सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा घटाने में ये तरीके कितने कारगर हैं।

Latest

भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक

राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की कार्यकारिणी में पास हुआ प्रकृति केंद्रित विकास का प्रस्ताव

भारतीय नदियों का भाग्य संकट में

गंगा बेसिन में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि

"रिसेंट एडवांसेज इन वॉटर क्वॉलिटी एनालिसिस"पर ऑनलाइन आयोजन

स्वच्छता सर्वेक्षण में उत्तराखण्ड और इंदौर इस बार भी अव्वल कैसे

यूसर्क देहरादून ने चमन लाल महाविद्यालय में एक दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया

प्राकृतिक नाले को बचाने का अनोखा प्रयास

यमुना हमारे सीवेज से ही दिख रही है, नाले बंद कर देंगे तो वो नजर नहीं आएगी

29 लाख कृषकों को मिलेगा सरयू नहर परियोजना का लाभ