जलवायु परिवर्तन बनेगा देश में अधिक मौतों का कारण

Source:दैनिक जागरण, 26 नवम्बर 2019

फोटो - India Today

वर्तमान में जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर एक गंभीर समस्या बनी हुई है। दुनियाभर की सरकारें और वैज्ञानिक अपने-अपने स्तर पर इससे निपटने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में सफलता दिखाई नहीं दे रही है। वहीं, हाल ही में इससे संबंधित एक अध्ययन में जो तथ्य सामने आए हैं, वे भारत की चिंता बढ़ाने वाले हैं। अध्ययन में आशंका जताई गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि होगी और इससे इस सदी के अंत तक देश में हर वर्ष 15 लाख लोगों की जानें जा सकती हैं। साथ ही अध्ययन में यह भी बताया गया है कि अगले 20 वर्षो में देश में ऊर्जा की खपत वर्तमान की तुलना में दोगुनी हो जाएगी। यानी जीवाश्म ईंधन की खपत बढ़ जाएगी। यदि उत्सर्जन की दर इसी तरह बढ़ती रही तो वर्ष 2100 तक देश में एक लाख लोगों में से 60 लोगों की जानें तापमान वृद्धि के कारण जाएंगी।

अध्ययन के मुताबिक, यह आंकड़े मुख कैंसर से होने वालीं मौतों की तुलना में दो गुने हैं। मुख कैंसर वर्तमान में देश में होने वाला सबसे सामान्य कैंसर है। ‘भारत में जलवायु परिवर्तन और गर्मी से प्रेरित मृत्यु दर’ नामक इस अध्ययन को शिकागो यूनिवर्सिटी में टाटा सेंटर फॉर डेवलपमेंट और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सहयोग से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में औसत वार्षिक तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की आशंका है। साथ ही पूरे भारत में अत्यंत गर्म दिनों (35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाला दिन) की संख्या में आठ गुना वृद्धि हो सकती है। यानी 2010 में अत्यंत गर्म दिनों की संख्या सालाना जहां 5.1 थी, वहीं 2100 तक यह 42.8 दिन हो जाएगी। वर्ष 2050 तक की बात करें तो रिपोर्ट में हर साल अत्यंत गर्म दिनों की संख्या 15.8 होने की आशंका जताई गई है।एनसीआर पर पड़ेगा अधिक प्रभाव : रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि का ज्यादा असर एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) पर पड़ने की बात कही गई है। इसमें बताया गया है कि 2100 तक एनसीआर में अत्यंत गर्म दिनों की संख्या में 22 गुना की वृद्धि देखने को मिलेगी और हर वर्ष जलवायु परितर्वन के कारण 23 हजार से अधिक जानें जाएंगी।

अत्यंत गर्म दिनों की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा ओडिशा में देखने को मिलेगा, जहां यह वृद्धि आज की तुलना में 30 गुना तक हो सकती है। वहीं, पंजाब की बात करें तो यहां सालाना करीब 85 दिन अत्यंत गर्म होंगे।छह राज्यों में होंगी 64 फीसद मौतें : अध्ययन में बताया गया है कि गर्मी के कारण होने वाली कुल मौतों में 64 फीसद केवल छह राज्यों में ही देखने को मिलेंगी। ये छह राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र हैं।ईंधन की अधिक खपत भी जिम्मेदार : वाहनों की संख्या सड़कों पर लगातार बढ़ती जा रही है, इससे व अन्य कारणों से भी गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। अध्ययन में बताया गया है कि उच्च उत्सर्जन वाले परिदृश्य में 2100 तक एक लाख पर मृत्यु दर 60 हो जाएगी। अध्ययन में इस बात को भी उठाया गया है कि गर्मी के कारण जान गंवाने वालों की संख्या उस देश की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका के धनी शहर ह्यूस्टन में जहां अत्यंत गर्मी के कारण एक दिन में एक लाख पर औसत मृत्यु दर 0.4 होगी, वहीं दिल्ली में यह आंकड़ा 0.8 होगा।

इन राज्यों में जाएंगी सबसे ज्यादा जानें

राज्य

ज्यादा मौतें/सालाना

उत्तर प्रदेश

4,02,280

बिहार1,36,372
राजस्थान1,21,809
आंध्र प्रदेश1,16,920
मध्य प्रदेश1,08,370
महाराष्ट्र1,06,749

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