जनजातीय स्वराज संगठन' घाटोल  ने लगाया पलायन पर रोक  

Author:विकास मेश्राम,क्षेत्रीय सहजकर्ता वाग्धारा

किसान को मनरेगा के तहत बनाकर दिया तलावड़ी पर प्रेम शंकर मईडा,फोटो:-विकास मेश्राम

राजस्थान के गांव – नेगरेड, तहसील – घाटोल, जिला -  बांसवाड़ा  का  'जनजातीय स्वराज संगठन' पानी और पलायन पर काम कर रहा है। संगठन द्वारा सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। 

संगठन का मानना है कि बेहतर आजीविका रोजगार और अच्छी जीवन शैली की तलाश में पलायन होता ही रहता है। सामान्य तौर पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर लोगों को जाने को प्रवास की संज्ञा दी जाती है। एक सीमा तक पलायन स्वैच्छिक होता है , जबकि अधिकतर पलायन किसी-न-किसी रूप में थोपा गया होता है।

भले किसी परिस्थिति, व्यक्ति या सरकार द्वारा की गई हो, विभिन्न कारणों से संयुक्त परिवारों में बिखराव ,कृषि जोतों के छोटे हो जाने से होता है। खेती के लाभ का अभाव, जनसँख्या में अनियंत्रित बढ़ोतरी  ग्रामीण एवं वन्य क्षेत्र प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि आदि ऐसे तमाम कारण हैं, जिनकी वजह से पलायन होता है। 

राजस्थान का बांसवाडा जिला भी इस कोरोना महामारी के कारण पलायन की दंश से अछूता नहीं है। ऐसी विकराल भयावह परिस्थिति में 'जनजातीय स्वराज संगठन' अपने घाटोल क्षेत्र में पलायन रोकने लिए  और लोगों को विविध सरकारी योजना से लाभान्वित करने हेतु सतत प्रयासरत हैं। 

समुदाय के विकास में परम्परागत एवं देशज अभ्यासों एवं ज्ञान को जैसे हलमा, नोत्र , हिरमा, जैविक खेती इत्यादि को सम्मिलित करना एवं प्राथमिकता प्रदान करना। सरकारी तंत्र के साथ मिलकर परिवारों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में अवगत करवाना। इसी  उद्देश्य से 'जनजातीय स्वराज संगठन' गठित 2018 में हुआ था। 

'जनजातीय स्वराज संगठन' के अध्यक्ष प्रेमशंकर मईडा अपने संगठन की भूमिका के बारे में बताते हैं कि यह संगठन जनजातीय लोगों की समस्याओं के प्रति जागरूक रहकर समस्या का समाधान खोजने हेतु सतत प्रयत्नशील है । मनरेगा के तहत  रोजगार दिलाने के लिए और पलायन पर रोकने के लिए 'जनजातीय स्वराज संगठन' की उपलब्धियों के बारे में  बताते हैं कि मनरेगा के तहत हमने 3 तलावड़ी बनवाई, जिसमें हुआ  4 .5 लाख का खर्च सरकारी योजनाओं से प्राप्त हुए ।

किसानों का कोई भी खर्च नहीं आया। यह सब हम ने खेती सिंचाई युक्त होने और जमीन का कटाव रोकने और पानी की लेवल सही रहे इसके लिए किया और आगे बताते हैं कि 2 चेकडैम बनवाए, 2 एनिकट, यह सब सरकारी परियोजना ‘पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत’ के अधिकारियों से ‘एडवोकेसी’ करके किया।

प्रेम शंकर मईडा आगे बताते है कि गांव से बाहर रोजगार करने हेतु लोग गये थे  व गांव में वापस आये तो उनको रोजगार की समस्या थी। क्योंकि तालाबंदी के कारण वो बेरोजगार हो गये। हमने 150  लोगों को मनरेगा के तहत संगठन के माध्यम से  ग्राम पंचायत से बातचीत करके रोजगार दिलवाए और उन लोगों को लाभान्वित किया।

40 लोगों को राशन कार्ड बनवाएं और जो गरीब और वंचित थे। उनको पंचायत समिति और तहसील ले जाकर सरकारी योजना से लाभान्वित किया। 100 लोगों को मनरेगा के तहत मेड़बंदी करवाई ताकि मिट्टी का कटाव रोका जा सके यह सब संगठन के माध्यम से हुआ है।