कचरे में सिमटता भारत

Author:सत्यमेव जयते
Source:सत्यमेव जयते, 15 मार्च 2014


आज पृथ्वी अपनी प्राकृतिक रूप खोती जा रही है। जहां देखो वहां कूड़े के ढेर व बेतरतीब फैले कचरे ने इसके सौंदर्य को नष्ट कर दिया है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या तथा औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में तेजी से वृद्धि के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट पदार्थों द्वारा उत्पन्न पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी विकराल होती जा रही है।हमारे देश में फसलों के अवशेष, पशु मल जैसे अपशिष्ट पदार्थ तो शुरू से ही उत्पन्न होते रहे हैं लेकिन शहरीकरण व औद्योगीकरण के कारण पॉलीथीन, बैग्स, प्लास्टिक डिब्बे, टिन तथा अन्य धातु के डिब्बे, कांच के अवशेष, कल-कारखानों में विभिन्न धातुओं की छीलन, औद्योगिक कचरा एक विकट समस्या बन चुका है। इसी समस्या पर आधारित आमिर खान द्वारा प्रस्तुत ‘सत्यमेव जयते’ का यह एपिसोड।

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