कृष्णा एवं पेनार प्रवहण क्षेत्रों (उप क्षेत्र-3 एच) के लिए बाढ़ आंकलन के सूत्र का विकास

Author:राकेश कुमार, राजदेव सिंह, पंकज गर्ग
Source:राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान
बाढ़ आंकलन की आधुनिक तकनीकों के विकसित हो जाने के उपरान्त भी उन क्षेत्रों के लिए जहां विस्तृत मात्रा में आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, अभियन्ताओं द्वारा विशेष रूप से लघु तथा मध्यम संरचनाओं के अभिकल्पन के लिए अनुभविक सूत्रों का प्रयोग किया जाता है। यद्यपि अधिकतर अनुभविक सूत्र जैसे की डिकेन का सूत्र, रीव का सूत्र, लिली का सूत्र आदि विभिन्न प्रत्यागमन काल की बाढ़ का आंकलन करने में सक्षम नहीं है।

उन स्थलों के लिए जहां पर पर्याप्त मात्रा में वार्षिक शीर्ष बाढ़ के आंकड़े उपलब्ध हैं, विभिन्न प्रत्यागमन काल की बाढ़ के आंकलन के लिए बाढ़ बारम्बरता विश्लेषण विधि का प्रयोग किया जाता है। जिन स्थलों के लिए वार्षिक शीर्ष के आंकड़े पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होते हैं या उपलब्ध ही नहीं होते हैं, उन स्थलों के लिए विभिन्न प्रत्यागमन काल की बाढ़ के आंकलन के लिए क्षेत्रीय बाढ़ बारम्बरता विश्लेषण विधि का प्रयोग किया जाता है।

इस प्रपत्र में कृष्णा एवं पेनार प्रवहण क्षेत्रों (उप क्षेत्र-3 एच) के लिए क्षेत्रीय समरूपता की जाँच यू.एस.जी.एस. विधि द्वारा की गई है। क्षेत्रीय बाढ़ बारम्बारता वक्रों का विकास करने हेतु 18 जलग्रहण क्षेत्रों के लिए उपलब्ध वार्षिक शीर्ष बाढ़ के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। इसके लिए प्रायिकता भारित आघूण के सिद्धांत पर आधारित जनरल एक्ट्रीम वैल्यू (जी.ई.वी.) वितरण प्रणाली का प्रयोग किया गया है। अप्रमाणित जलग्रहण क्षेत्रों के लिए औसत वार्षिक शीर्ष बाढ़ का मान आंकलित करने हेतु उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर औसत शीर्ष बाढ़ तथा जलग्रहण क्षेत्रफल में संबंध स्थापित किया है। इस संबंध का क्षेत्रीय बाढ़ बारम्बरता वक्रों के साथ समन्वय करते हुए, एक क्षेत्रीय बाढ़ सूत्र का विकास किया गया है। इस सूत्र का उपयोग उपक्षेत्र-3 एच के अप्रमापित जलग्रहण क्षेत्रों के लिए विभिन्न प्रत्यागमन काल की बाढ़ का आंकलन करने हेतु सरलतापूर्वक किया जा सकता है।

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