कट्टा: कासरगोड का पारंपरिक चेकडैम

Author:TA AMEERUDEEN

शिरिया नदी और उसकी सहायक नदियों  में येल्का गाँव के ग्रामीण हर साल नवंबर में चेकडैम  का निर्माण करते है । केरल में पिछले 70 सालों से पानी के सरंक्षण के लिए चेक डैम बनाये जा रहे है  गांवों में बनाये जाने वाले ये चेक डैम  जिसे केरल में कटास  कहते है पहले इसमें पानी सरंक्षित किया जाता है उसके बाद बिजली के माध्यम से इसे अपलिफ्ट कर सिंचाई के उपयोग में लाया जाता है कट्टा को मानसून के आने से पहले ही करीब जून में तोड़ दिए जाते है । एथड़का एक गांव है, करीब 24 किलोमीटर दूर है जिला मुख्यालय से जो उत्तर पूर्व में पड़ता है  यहां के किसान पूरी तरह से कट्टा पर निर्भर करते है  यहां पर इनकी मुख्य फसले कोकोनट ,पैड़ी कोको आदि है  कट्टा मड स्टोन से बनाएं जाते है पिछले कुछ सालों से कट्टा को बनाने में सैंड बैग्स और एक खास किस्म की पॉलिथीन का उपयोग किया जा रहा है किसानों का कहना  है कि पॉलिथीन के इस्तेमाल से मिट्टी के उपयोग को कम किया जाता है और अधिक मजबूती भी मिलती है एक स्थानीय पत्रकार चंद्रशेखर  बताते है की चेक डैम को बनाने के लिए किसी भी तरह की इंजीनियरिंग का इस्तेमाल बाहर से नही किया जाता किसान खुद ही अपने आप में इंजीनियर है और एक सफल चेकडैम का निर्माण कर लेते है वही कृषि विशेषज्ञ पत्रकार श्री पद्रे कहते है कि बिना कट्टा के आप इस गांव  की कल्पना नही कर सकते है कट्टे बड़ी मात्रा में पानी को रोकते है। उनकी पानी रोकने की क्षमता उनकी लंबाई और ऊंचाई पर निर्भर करती है एथड़का के छोटे कट्टे 5000 लीटर तक स्टोर कर पाते हैं,जबकि बड़े कट्टो की क्षमता 12000 लीटर है।

स्थानीय किसान  उदयशंकर भट्ट कहते है कि बेरकादुवा कट्टा  एथड़का का सबसे बड़ा कट्टा है ये 4 मीटर ऊंचा और 40 मीटर चौड़ा है और 12 करोड़ लीटर पानी इसमें सरंक्षित किया जा सकता है एक और किसान माधव भट कहते है कि मेरे पास 3 एकड़ जमीन है जिसपर में ऐरेका और कोकोनट उगाता हूं और उन्हें उगाने के लिए उस पानी का इस्तेमाल करता हुँ जो कट्टो में होता है। ये एक कट्टे की लंबाई 35 मीटर है और ऊंचाई 4 मीटर और इसकी स्टोरेज की क्षमता 10 करोड़ लीटर है और ये करीब 40 एकड़ की जमीन की सिंचाई कर सकता है । किसान डॉक्टर वाई डी प्रकाश  कहते है कि हम कई वर्षों से यह काम कर रहे है, अगर एक बार कट्टे का पूरा काम कर लेंगे तो 15 अप्रैल तक  पर्याप्त पानी प्राप्त कर सकेंगे । और इस पानी से हम अपनी फसलों की  सिंचाई भी कर पाएंगे।डॉक्टर वेणु गोपाल  बताते है कि उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर इस कट्टा का निर्माण किया है, ,पहले इसे बनाने में  ग्रेनाइट और मड का इस्तेमाल करते थे जो व्यवसायी था  लेकिन  अब हम हाई डेंसिटी पॉलिथीन का इस्तेमाल करते है इससे हमारी लेबर भी घटी है और सटीकता भी बढ़ी है किसान आमतौर पर कट्टा बनाने में एक से दो लाख रुपये खर्च करते थे मतलब एक एकड़ पर लगभग 4 हजार रुपये का खर्च आता है काटास बनाने में तो इसके हिसाब से हर साल लाखों रुपये खर्च करना किसान के लिए एक बड़ी चुनौती था लेकिन अब हमने खुद के संसाधन जुटाने शुरू कर दिए है। 

किसान केशव शर्मा बताते है कि नेरापड़ीं कट्टा सबसे पहले करीब यहां 40 साल पहले बनाया गया था 1लाख रूपए कट्टा बनाने में खर्च होते है वही दूसरे विशेषज्ञ बताते है पिछले साल कट्टे बनाने में 1 लाख का खर्चा आया था जिसे 7 लाभार्थी किसानों में  पर एकड़ के हिसाब से बाँटा जाए तो 4 हज़ार 850 एक के हिस्सा में आते है इतनी बड़ी रकम खर्च करना चुनौती है। हम अपने संसधानों का इस्तेमाल करते है कट्टा बनाने में । कट्टा बनाने में स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत पड़ती है और 1 काटास कट्टा बनाने में 10 से 12 व्यक्तियों की जरूरत पड़ती है जो उसे करीब दो हफ़्तों में बनाकर तैयार करते है।मजदूर नारायण मूल्य कहते है एक कट्टा को बनाने 1 महीने का समय लगता है जो बेहद संघर्षपूर्ण होता है जिसमें पत्थरो को लाना उन्हें धोना उसमें मिट्टी को मिलाना और फिर उनसे पानी को रोकना  ये वाकई बड़ा काम है 

वही सुपरवाइजर चिनपा कट्टा बनाने की विभिन्न तारीफों के बारे में बताते है कि पहला टास्क पानी से मिट्टी को मिक्स करने का होता है जो परिपक्व होने के लिय 2 हफ्ते लेती है यानी 2 हफ्ते तक मिक्स मिट्टी को पकाना होता है उसको पत्थरो पर लगाते है फिर सको मड मैक्स में रख देते है और अंत मे कट्टा को तरपोलिश शीट से ढक देते है । फिर एक कोने से दूसरे कोने तक मिट्टी के लेप को चिपकाते है एक और किसान गणपति भट्ट कहते है कट्टा का निर्माण बेहद कठिन है इसको बनाने के लिए अच्छे हुनर की जरूरत होती है अब इसको बनाने वाले कम ही लोग बचे हैं कट्टा बनाने  से यहां के लोगों को काफी फायदा पहुंचता है ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल कट्टा के माध्यम से होता है अगर हम कट्टा बनाते हैं तो यह सामज के लिए बेहतर फायदेमंद साबित होगा। 

 

इस वीडियो के अंग्रेजी वर्जन को देखने के लिये इस लिंक को दबाएं:- https://youtu.be/0x24X51Jkok?t=15

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