कुदरत ने कुछ भी 'वेस्ट' नहीं बनाया है - विजय चारयार

Author:मीनाक्षी अरोड़ा

विशेष रेडियो श्रृंखला “जल है तो कल है”विशेष रेडियो श्रृंखला “जल है तो कल है”

विश्व जल दिवस के अवसर पर विशेष रेडियो श्रृंखला “जल है तो कल है” इंडिया वाटर पोर्टल प्रस्तुत कर रहा है। यह कार्यक्रम वन वर्ल्ड साउथ इंडिया के सहयोग से प्रस्तुत किया जा रहा है। 22 मार्च को प्रसारित कार्यक्रम के हमारे मेहमान विशेषज्ञ- विजय राघवन चारयार रहे। विजय चारयार आइआइटी में प्राध्यापक हैं। ‘सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नॉलॉजी’ से जुड़े विजय चारयार इकोलॉजिकल सेनिटेशन, ग्रामीण प्रोद्यौगिकी और ग्रीन कम्पोजिट के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

 



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यह कार्यक्रम एआईआर एफएम रेनबो इंडिया (102.6 मेगाहर्टज) पर रोजाना 18-23 मार्च, 2010 तक समय 3:45- 4:00 शाम को आप सुन सकते हैं।

कार्यक्रम आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं

इकोलॉजिकल सैनिटेशन या इकोशैन क्या है? क्या जरूरत है कि इस विषय पर बात की जाय? वाटरलेस यूरिनल के बारे में? वाटर हारवेस्टिंग की तरह क्या मूत्र हार्वेस्टिंग की जरूरत है? आदि सवाल पर विजय चारयार ने अपनी बात बेवाकी से रखी है।

एक मजेदार बातचीत है। विजय चारयार अपने रोचक तरीके और साफगोई से यह समझाने में सफल रहते हैं कि इकोशैन के मायने किर्फ पानी की बचत ही नहीं, यह हमारे जीवन का कितना जरूरी हिस्सा है। कुदरत ने कुछ भी 'वेस्ट' नहीं बनाया है।

इन सबके बारे में आप उनका उत्तर सुन सकते हैं। सुनें उनसे बातचीत