क्‍यों गिरते हैं ओले

Author:विज्ञान आपके लिये
Source:विज्ञान आपके लिये, जनवरी-मार्च, 2016

जब पानी एक बूँद के रूप में गिरता है तो पृष्ठ तनाव के कारण पानी की बूँद का आकार गोल हो जाता है। ठीक इसी तरह जब आसमान से पानी गिरता है तो वह बूँद के रूप में होता है, जोकि गोल होती है। जब तापमान शून्य से कम होता है तो ये गोल बूँदें ही बर्फ बन जाती हैं। कई बार इनमें बर्फ की कई सतहें होती हैं, जिसके कारण ये बड़े आकार के ओले के रूप में गिरती हैं।

कई बार आपने देखा होगा कि बारिश के दौरान अचानक पानी की बूँदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले यानि हेल स्टोर्म कहते हैं। क्या अपने कभी सोचा है कि ये ओले कैसे बनते हैं और फिर अचानक जमीन पर क्यों गिरने लगते हैं?

यह तो हम जानते ही हैं कि बर्फ पानी की ही एक अवस्था है और यह पानी के जमने से बनती है। जब भी पानी का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या इससे कम हो जाता है तो वह बर्फ बन जाता है। जैसे-जैसे हम समुद्र तल की अपेक्षा ऊँचाई की ओर बढ़ते हैं, तो तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में भी पहाड़ों पर ठंडक होती है। आपको पता होना चाहिए कि वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया के द्वारा नदियों, तालाबों, झीलों तथा समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है, जिसके फलस्वरूप बादल बनते रहते हैं। और यही बादल समय-समय पर बारिश करते रहते हैं।

लेकिन जब आसमान में तापमान शून्य से कई डिग्री कम हो जाता है तो वहाँ हवा में मौजूद नमी संघनित हो जाती है और यह पानी की छोटी-छोटी बूँदों के रूप में जम जाती है। इन जमी हुई बूँदों पर धीरे-धीरे और पानी जमता जाता है और अंततः ये बर्फ के गोल टुकड़ों का रूप धारण कर लेती हैं। जब इन टुकड़ों का वजन काफी अधिक हो जाता है तो नीचे गिरने लगते हैं। गिरते समय वायुमंडल में मौजूद गरम हवा से टकरा कर ये पिघलने लगते हैं और पानी की बूँदों में बदल जाते हैं, जोकि बारिश के रूप में नीचे गिरते हैं। लेकिन बर्फ के अधिक मोटे और भारी टुकड़े जो पूरी तरह पिघल नहीं पाते हैं, वे बर्फ के छोटे-छोटे गोल-गोल टुकड़ों के रूप में ही धरती पर गिरते हैं।

बारिश के साथ गिरने वाले बर्फ के इन्हीं छोटे-छोटे गोल टुकड़ों को हम ओले कहते हैं। आमतौर से जब ओले गिरते हैं, तो बादलों में गड़गड़ाहट और बिजली की चमक बहुत अधिक होती है। जब कभी भी आप बादलों में गड़गड़ाहट और बिजली की चमक देखें तो समझ लीजिये कि बादलों का कुछ भाग निश्चित ही हिमांक से ऊपर है तथा कुछ भाग हिमांक से नीचे है। समान्यतः बादलों की गड़गड़ाहट उस समय होती है जब दिन गरम हों और वायु में काफी नमी हो। गरम और नम हवा ठंडी और शुष्क हवा से ऊपर उठना चाहती है। जैसे-जैसे यह ऊपर उठती है तो यह ठंडी होती जाती है और जल कणों के रूप में संघनित होती जाती हैं, और छोटे-छोटे बर्फ के गोल टुकड़ों का आकार ले लेती है।

हो सकता है आप सोच रहे हों कि ओले गोल ही क्यों होते हैं? दरअसल, जब पानी एक बूँद के रूप में गिरता है तो पृष्ठ तनाव के कारण पानी की बूँद का आकार गोल हो जाता है। ठीक इसी तरह जब आसमान से पानी गिरता है तो वह बूँद के रूप में होता है, जोकि गोल होती है। जब तापमान शून्य से कम होता है तो ये गोल बूँदें ही बर्फ बन जाती हैं। कई बार इनमें बर्फ की कई सतहें होती हैं, जिसके कारण ये बड़े आकार के ओले के रूप में गिरती हैं।

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