खेती बदली रे, आस जागी रे

Author:राकेश खत्री
Source:जनहित फाउंडेशन, मेरठ


हमारी खेती केवल अनाज पैदा करने का साधन मात्र नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति से जुड़ी हुयी है। हमारी खेती, जल-जमीन-जंगल, जानवर, जन के सहचर्य- सहजीवन और सह-अस्तित्व की परिरचायक हैं। ये पाचों एक दूसरे का पोषण करने वाले और एक दूसरे को संरक्षण देने वाले हैं सबका जीवन और अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर है।

अब तो अधिकतर कृषि वैज्ञानिक, जानकार आदि भी मानने लगे हैं कि हमारी परम्परागत फसल पद्वति ही बेहतर और टिकाऊ है। अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये हमें अपनी खेती को बेहतर बनाना होगा। रसायनिक खादों, कीटनाशकों, पानी और बीज के अनियंत्रित उपयोग को रोकते हुये एवं जैविक खेती पद्वतियों को अपनाते हुए खेती की लागत कम और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास करने होंगे ।

फिल्म मे यही दर्शाया गया है की किस तरह मेरठ की स्वयं सेवी संस्था जनहित फाउंडेशन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये काम कर रहा है। इस फिल्म में बीज से बाजार तक का सफर दिखाया गया है और इस बात पर रोशनी डाली गई है कि जैविक खेती से कैसे एक किसान न केवल अपनी फसल की उत्पादकता बढ़ा सकता है बल्कि आय भी बढ़ा सकता है।

Latest

कैसे प्रदूषण से किसी देश की अर्थव्यवस्था हो सकती है तबाह

भारत में क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस

वायु प्रदूषण कम करने के लिए बिहार बना रहा है नई कार्ययोजना

3.6 अरब लोगों पर पानी का संकट,भारत भी प्रभावित: विश्व मौसम विज्ञान संगठन

अब गंगा में प्रदूषण फैलाना पड़ेगा महंगा!

बीएमसी ने पानी कटौती की घोषणा की; प्रभावित क्षेत्रों की पूरी सूची देखें

देहरादून और हरिद्वार में पानी की सर्वाधिक आवश्यकता:नितेश कुमार झा

भारतीय को मिला संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

जल दायिनी के कंठ सूखे कैसे मिले बांधों को पानी

मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी झील पर बीएमसी ने बनाया मास्टर प्लान