न गाँव में न स्कूल में मिल रहा है फ्लोराइडमुक्त पानी

Author:प्रेमविजय पाटिल

.धार। तिरला विकासखण्ड के अनेक ग्रामों में अभी भी फ्लोराइडमुक्त पानी नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि जिन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना था वे पूरी तरह से ठप है। कई बार इस तरह के मामले सामने आने पर भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कोई तत्परता नहीं दिखाई।

इसी का परिणाम है कि तिरला विकासखण्ड के भीतरी क्षेत्रों में आज भी पानी स्वच्छ नहीं मिल पा रहा है। जबकि नए आदेश के तहत यह कह दिया गया है कि अब किसी भी स्तर पर नलकूप जिसमें कि फ्लोराइडयुक्त पानी आता है उनका उपयोग नहीं किया जाये। इन्हें बन्द करने की हिदायत दे दी गई है। दूसरी ओर स्कूल में लगाए गए फिल्टर भंगार हो चुके हैं। ये फिल्टर अब दिखावा साबित हो रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि जिले में फ्लोराइडयुक्त पानी से लोग परेशान हैं। खासकर तिरला, सरदारपुर क्षेत्र में परेशानी ज्यादा है। फ्लोराइडयुक्त पानी देने की जिम्मेदारी शासन की है किन्तु इस मामले में कहीं-न-कहीं जिम्मेदार विभाग अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा पा रहा है।

जहाँ-तहाँ पाइप लाइन फूट गई है। टंकियाँ खराब हो रही हैं। जिन कुओं से पानी लेना है उनमें पानी तो है किन्तु मोटर खराब पड़ी हुई है। तिरला विकासखण्ड के अनेक ग्रामों में ये हालात हैं। मोहनपुरा से लेकर अन्य क्षेत्रों में इस परेशानी से ग्रामीण जूझ रहे हैं। स्कूलों में लगे फिल्टर खराब हो चुके हैं। इनका कभी ठीक से उपयोग नहीं हो सका। लाखों रुपए जिन्हें खर्च किया गया जिसका लाभ ही नहीं मिल पाया।

 

बारिश में भी दिक्कत


वर्षाकाल में भी लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। जबकि यह ऐसा समय है। जब पानी को लेकर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। बारिश के कारण भूजलस्तर सुधर गया है और नलकूपों में पर्याप्त पानी आ गया है। लेकिन स्वच्छ पानी के लिहाज से ग्रामीण नलजल योजना बन्द पड़ी हुई है और उनका संचालन नहीं हो पाना चिन्ता का कारण है।

 

 

 

सुरक्षित सोर्स से पानी लें


इधर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरी क्षेत्र। जहाँ फ्लोराइड या अन्य समस्या है तो वहाँ सुरक्षित सोर्स से ही पानी लिया जाए। ऐसे हैण्डपम्प जिनमें कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक है उन्हें बन्द करवाया जाये। वर्तमान में ग्रामीणों को यह सहुलियत दे रखी थी कि जो फ्लोराइडयुक्त पानी है उसका घरेलू काम में उपयोग लिया जाये। लेकिन देखने में आया है कि लोग घरेलू काम के साथ इसे पीने के पानी में भी उपयोग करने लगते हैं।

 

 

 

 

 

 

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