ना अति बरखा ना अति धूप

Author:घाघ और भड्डरी

ना अति बरखा ना अति धूप।
ना अति बकता ना अति चूप।।


भावार्थ- अत्यधिक वर्षा अच्छी नहीं होती, बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं होती, इसी प्रकारच अत्यधिक बोलना और अत्यन्त चुप रहना भी अच्छा नहीं होता।