‘नक़्शे’ पर देखें देश (Nakshe Portal - www.soinakshe.uk.gov.in)

Author:उमाशंकर मिश्र
Source:इंडिया साइंस वायर, 24 अप्रैल, 2017

नई दिल्लीः प्रशासन, सुरक्षा, कृषि, सिंचाई, वन-प्रबंध, उद्योग, संचार आदि विविध क्षेत्रों में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मानचित्र पहली आवश्यकता है। किसी देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानचित्र बेहद जरूरी होते हैं। भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) ने अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगाँठ के मौके पर नया वेब पोर्टल ‘नक़्शे’ लांच किया है, जिस पर देश के विभिन्न हिस्सों के ओपन सीरीज मैप (ओएसएम) निशुल्क देखे जा सकते हैं। इन मानचित्रों का उपयोग अध्ययन एवं विकास सम्बंधी नीतियों और कार्ययोजनाओं के निर्धारण में आसानी से किया जा सकेगा।

Nakshe Portal - www.soinakshe.uk.gov.inनेशनल डाटा शेयरिंग एंड एक्सेसिबिलिटी पॉलिसी (एनडीएसएपी) के तहत अब डाटा को सार्वजनिक रूप से मुहैया कराया जाना जरूरी हो गया है। भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत बनाये गये ‘नक़्शे’ वेब पोर्टल का उपयोग अध्ययनकर्ताओं से लेकर केंद्र सरकार और गाँव के प्रधान भी आसानी से कर सकेंगे। केंद्र सरकार से लेकर तालुका एवं पंचायत के स्तर तक विकास सम्बंधी नीतियों के निर्माण एवं उनके क्रियान्वयन में इन मानचित्रों से मदद मिल सकती है। 1:50,000 के पैमाने पर बने ये मानचित्र ‘नक्शे’ वेब पोर्टल से पीडीएफ फ़ाइल के रूप में डाउनलोड किये जा सकते हैं। इसके लिए बस आपको अपना आधार नंबर बताकर पहचान सुनिश्चित करानी होगी।

परिशुद्ध मानचित्र बनाने का कम आसन नहीं है। इस कार्य को समुचित ढंग से करने के लिए भारत सरकार ने ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई)’ स्थापित किया है। वर्ष 1767 में स्थापित ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ के कार्यों की जानकारी आम लोगों को भले ही न हो, लेकिन इसकी भूमिका आम जनजीवन को हर दिन प्रभावित करती है।

कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल प्रदेश तक भारत की गोद में बसे जंगल, नदियाँ, बर्फ के पहाड़, पत्थर, घाटियाँ, मैदान और उनमें बिखरी विपुल प्राकृतिक सम्पदा, खनिज एवं मानव संसाधन का प्रबंधन पूरे देश के भौगौलिक रेखाचित्र के बिना करना संभव नहीं है। इस असंभव को संभव बनाने के लिए 'एसओआई' पिछले 25 दशकों से अपना योगदान दे रहा है।

पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को वैज्ञानिक परिशुद्धता के साथ मापने और एवरेस्ट की ऊँचाई से दुनिया का परिचय कराने का श्रेय 'एसओआई' को ही जाता है। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत 'एसओआई' भारत सरकार का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है, जो देश के विभिन्न हिस्सों की स्थलाकृति की विस्तृत जानकारी उपलब्द्ध कराता है, जिससे विकास सम्बंधी नीतियों और कार्य-योजनाओं के निर्धारण में मदद मिलती है। इस लिहाज से भारत की मैपिंग एजेंसी ‘सर्वे आफ इंडिया’ या 'एसओआई' का देश के विकास में योगदान उल्लेखनीय रहा है।

भारती सर्वेक्षण विभाग ने अब तक कुल 5000 मानचित्र बनाए हैं, जिसमें से 3000 मानचित्र ‘नक़्शे’ पोर्टल पर उपलब्ध हैं। जबकि 1300 मानचित्र ‘नक़्शे’ पोर्टल पर अपलोड किये जा रहे हैं, जो जल्दी ही सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो जायेंगे। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सीमाओं और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े 700 नक्शों की समीक्षा की जा रही है। रक्षा विभाग की स्वीकृति के बाद उन्हें भी पोर्टल पर अपलोड कर दिया जायेगा।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) की 250वीं वर्षगाँठ के मौके पर 10 अप्रैल को राष्ट्रीय सर्वेक्षण दिवस के दिन ‘फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैम्बर्स ऑफ़ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की)’ और विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक कान्फ्रेंस में ‘विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्री’ डॉ हर्षवर्धन ने ‘नक़्शे’ पोर्टल लॉन्च किया था। इस कान्फ्रेंस में ‘जिओ पोर्टल’ एवं जीआईएम वेब सर्विसेज प्रोविजन प्लेटफार्म की शुरुआत विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री वाईएस चौधरी ने की। जियो-पोर्टल का विकास राष्ट्रीय मानचित्र नीति (एनएमपी)-2005 के अनुरूप राष्ट्रीय भू-स्थानिक डाटाबेस (एनटीडीबी) के प्रसार के लिए किया गया है।

‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ भूगर्भ या स्थलाकृति सहित प्राकृतिक और मानव निर्मित भौगोलिक विशेषताओं वाला भौगोलिक मानचित्र अथवा ओपन सीरीज मैप (ओएसएम) पिछले ढाई सौ वर्षों से लगातार बना रहा है और आज भी यह संस्था राष्ट्रीय मानचित्र नीति के अनुसार ही कम कर रही है।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग को दुनिया के सबसे पुराने सर्वेक्षण प्रतिष्ठानों में शुमार किया जाता है, जिसने देश की तरक्की, समृद्धि एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया है। 'एसओआई' अभियान और एकीकृत विकास के लिए आधार मानचित्र उपलब्ध कराता है और सुनिश्चित करता है कि सभी संसाधनों का उपयोग देश की प्रगति, उन्नति और सुरक्षा के लिए हो।

भारत के महासर्वेक्षक जार्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में भारत पहला देश था, जिसने 1855 में माउन्ट एवरेस्ट की ऊँचाई दुनिया को बताई और इसे विश्व की सबसे ऊंची चोटी के रूप में स्थान दिलाया। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को वैज्ञानिक परिशुद्धता के साथ मापने के लिए ‘ग्रेट त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण’ का श्रेय भी भारतीय सर्वेक्षण विभाग को जाता है। ‘ग्रेट त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण’ भारतीय सर्वेक्षण विभाग की एक परियोजना थी, जो 19वीं शताब्दी में चली थी। इसको आरंभिक दौर में विलियम लैम्बटन ने चलाया था और बाद में जॉर्ज एवरेस्ट ने संचालित किया। इसके अंतर्गत ब्रिटिश भारत में मानचित्र बनाना, हिमालय क्षेत्रों की ऊँचाई मापने जैसे कार्य किये जाते थे।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने इस साल माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई को फिर से मापने का प्रस्ताव रखा है। अप्रैल, 2015 में नेपाल में भीषण गोरखा-भूकंप के बाद वैज्ञानिक समुदाय के संदेह को दूर करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के साथ मिलकर एवरेस्ट की ऊंचाई को फिर से मापने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग के सचिव आशुतोष शर्मा का सुझाव है कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग को नदियों का सर्वेक्षण एवं मैपिंग करनी चाहिए, जिससे हाइड्रो-पावर प्लांट एवं स्मार्ट शहरों के निर्माण और भू-स्थानिक नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।

भारत के महासर्वेक्षक डॉ स्वर्ण सुब्बाराव के मुताबिक भारतीय सर्वेक्षण विभाग समय के साथ लगातार विकसित हो रहा है और विभिन्न वैज्ञानिकों तकनीकों के मुताबिक खुद को ढाल-कर देश के विकास में योगदान दे रहा है।

 

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