पानी, आदमी और गिलास

Author:सीताराम गुप्ता
Source:राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका 'जल चेतना', जुलाई 2013

मेरे पास
नहीं है एक गिलास
किसी को कैसे पिलाऊ पानी?
मैं चाहता हूं
मेरे पास भी हो एक गिलास
पिलाने को पानी
तभी न पिला पाऊंगा
पानी किसी को
पर देखता हूं
नहीं है पानी हर गिलास में
मैं इतना जरूर चाहता हूं
न हो गिलास
तो भी हो
पानी जरूर मेरे पास
पानी प्यास को करता है शांत
ओक से ही चाहे
पीया-पिलाया जाए पानी
गिलास नहीं बुझाता है प्यास
बिना पानी का गिलास
भड़काता है और प्यास
पानी फिर भी
ढाल लेता है अपना आकार
पानी होगा तो
ढल जाएगा गिलास भी
गिलास
नहीं बदल सकता आकार
न ही पैदा कर सकता है पानी
जरूरी है पहले पानी की खोज
पानी होगा तो
अपने आप हो जाएगा गिलास
पानी हो
और हथेली हो
बनाने को ओक
तो जरूरी भी नहीं है
गिलास
गिलास होगा तो
कीमत नहीं हथेली की
कीमत नहीं हथेली की तो
कीमत नहीं आदमी की भी
गिलास से नहीं
कीमत आदमी की है पानी से
गिलास कीमती है तो
अलग करता है ये
आदमी से आदमी को
बनाता है छोटा-बड़ा
आदमी को कीमती गिलास
आदमी और पानी
दोनों की कीमत
कम करता है गिलास
पानी और आदमी के बीच
फालतू चीज है गिलास
पर बेहद जरूरी है
आदमी के पास हो पानी
बेशक
न भी हो ज्यादा पानी
आदमी के पास
पर यदि
है आदमी सजग
पानी के प्रति
तो
पानी की कमी का
क्या काम?

सम्पर्क :
श्री सीताराम गुप्ता, ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा, दिल्ली-110034,
फो. नं. 011-27313679/9555622323

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