पानी बोलता है

Author:अरुण तिवारी

गंगा मंदिरगंगा मंदिरअखबारों में, मंचों पर, नदी की लहरों में, समुद्र की गर्जना में, बारिश की बूंदों में..पानी पा जाने पर तृप्त आसों में तो मैने पानी की आवाज पहले भी सुनी थी, लेकिन यह आवाज मेरे लिए नई थी। जहां पानी दिखता न हो, वहां भी पानी की आवाज! गढ़मुक्तेश्वर के गंगा मेले में जाते समय हमें रास्ते में एक ऐसा मंदिर मिला, जहां पानी बोलता है। हमारे साथ चल रहे स्थानीय पत्रकार श्री भारत-भूषण ने हमें बताया कि यहां पानी बोलता है। हमारे पूछने से पहले ही सबसे ऊपर की सीढ़ी पर खड़े एक बालक ने एक कंकड़ नीचे लुढ़का दिया। एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी। पत्थर गिरता गया और आवाज आती गई-ढब,ढब..ढब! मैने पैरों को सुर-ताल में साधकर सीढ़ियों पर चलाना शुरू किया, तो एक जलतरंग ही बज उठी। वाह, क्या बात है! मेरे मुंह से निकला।

सीढ़ियों के नीचे बोलते पानी का विज्ञान क्या है, मैं नहीं जानता... लेकिन स्थानीय आस्था इसके कई अर्थ निकाल लेती है। इस मंदिर में मां गंगा की एक सुंदर मूर्ति और उसके सामने गंगा वंदना व कई उल्लेखनीय महात्म दर्ज हैं। जिन्हें अपने कैमरे में मैं गंगाप्रेमियों के लिए उतार लाया हूं। देखें।

गढ़मुक्तेश्वर-उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की एक तहसील है और दिल्ली से 90 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंगा किनारे स्थित है। यह मंदिर गढ़मुक्तेश्वर के चटाई मोहल्ले में स्थित है। चटाई मोहल्ला यानी नदी के नरकुल की पत्तियों से चटाई बनाने वालों का मोहल्ला। चटाइयां ही चटाइयां!! फिलहाल इस गंगा मंदिर के सामने की जमीन अब किसी सरकारी आवास योजना में आवंटित कर दी गई है। हालांकि मंदिर में स्थापित गंगा मूर्ति देखकर नहीं लगता, लेकिन बताया गया कि यह गढ़मुक्तेश्वर का सबसे प्राचीन मंदिर है। पहले गंगा इससे सटकर बहती थी; आज काफी दूर चली गई है। फिर भी गंगा का पानी यहां बोलता है। सीढ़ियां देखने में एकदम सूखी हैं, लेकिन उनके नीचे पानी की स्वरलहरी आज भी जीवंत हैं। आज भी इस गंगा मंदिर की देखभाल के लिए पुजारी है, लेकिन दर्शनार्थियों के दर्शन कभी-कभार ही होते हैं। आप कभी गढ़ जायें, तो पानी की आवाज सुनने यहां जरूर जायें और हां! यदि इसके विज्ञान को जान सकें, तो हमें भी बतायें।

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