पानी के लोग: 30-35 साल से कैद है गंगा

Author:केसर सिंह

गंगा भारत की ही बल्कि दुनिया की सबसे पवित्र नदी है। भारत में गंगा को पूजनीय माना जाता है। विभिन्न मान्यताओं का अनुपालन करते हुए गंगा की विभिन्न स्थानों पर अलग अलग तरीके से पूजा की जाती है, लेकिन शासन, प्रशासन और जनता की उदासीनता के कारण गंगा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। गंगा की अविरल धारा को बांधों में बांध दिया गया है। ऐसे में देश भर में गंगा की बात होनी चाहिए, जो कि नहीं हो रही है। इंडिया वाटर पोर्टल ने पानी के लोगों की एक सीरीज चलाई है। जिसमें आज माटू जन संगठन से जुड़े विमल भाई के साथ गंगा के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। जहां आपको गंगा और टिहरी बांध के बारे में सभी कुछ विस्तार से जानने को मिलेगा।

विमल भाई, माटू-जन संगठन से जुड़े हुए हैं। ‘माटू-जन संगठन’ ‘जन-आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय का हिस्सा है। पिछले 30-35 सालों से विमल भाई गंगा-यमुना घाटी में बन रहे बांधों के खिलाफ सक्रिय हैं। अकेले गंगा घाटी में 57 से ज्यादा बांध या तो बनाए जा चुके हैं या बन रहे हैं, और दर्जनों प्रस्तावित हैं। जिनमें गंगा कैद होकर रह गई है। विमल भाई कहते हैं कि हम बांध विरोधी नहीं हैं, पर क्या सरकारें बड़े बाँधों के बड़े-बड़े दावों और वादों का हिसाब नहीं देंगी? और इसकी कोशिश ही हम कर रहे हैं। पेश है इंडिया वाटर पोर्टल के संपादक केसर सिंह का विमल भाई से गंगा के सवालों पर लम्बी बातचीत का संक्षिप्त अंश।

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