पाली सोलर लिफ्टिंग योजना: एक साझा अनुभव

Author:मकान सिह, भण्डारी
Source:लोक विज्ञान संस्थान,देहरादून

पाली सोलर लिफ्टिंग योजना,फोटो साभार :मकान सिह, भण्डारी 

उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल  ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

गांव का परियोजना में चयन

राष्ट्रीय हिमालयन अनुसन्धान प्रबन्धन( एनएमएचएस)  परियोजना के अर्न्तगत इस गांव का चयन वर्ष 2018 में लोक विज्ञान संस्थान द्वारा किया गया। इस योजना के अर्न्तगत पारम्परिक स्रोतों का संरक्षण एंव संवर्द्वन करना था।  इस योजना के लिए पाली गांव का चयन हुआ और इस गांव की पानी की निर्भरता एक ही स्रोत पर थी।

पाली धारा

यह धारा गांव के बसावट के समये से ही चल रही  है। लेकिन धीरेः-धीरे इस स्रोत का पानी गर्मियों में काफी कम हो जाता था। गांव से 300 मी0 निचले हिस्से में स्थित यह स्रोत लगातार अपने संरक्षण की तलाश कर रहा था।  पाली गांव के निवासियों को लगातार यह चिन्ता सताने लगी थी कि, एक तो स्रोत गांव के निचले हिस्से में हैं और ऊपर से लगातार पानी घट रहा है। ऐसे में बचे हुए परिवार क्या पाली में लम्बे समय तक रूक पायेगें ! या फिर आखिरकार, पाली को खाली ही होना पड़ेगा।

वर्तमान स्थिति

इस पानी के स्रोत का पानी कम होना अचानक नही था, बल्कि इसका मुख्य कारण एक दशक के अन्तराल में खेती का बंजर होना, जलवायु परिवर्तन, आग लगना, गांव के ऊपरी हिस्सों में ज्यादातर हैडपम्पों का लगना, स्रोतों का संरक्षण एंव संवर्द्वन नही करना आदि शामिल थे । इन्ही हस्तक्षेप को रोकने के लिए परियोजना के अर्न्तगत ग्रामीण सहभागिता के आधार पर जल संरक्षण क्षेत्र का ट्रीटमेंट, भूमि कटाव को रोकना, भू-जल को बढावा देना, खतियों का निर्माण, वृक्षारोपण आदि कार्य प्रस्तावित थे।

बैठकों का आयोजन

योजना के उद्देशों की पूर्ति के लिए समुदाय के साथ बैठकों का दौर आरम्भ किया गया। सामुदायिक गतिशीलता पर भी जोर दिया गया। तथा महिलाओं एंव यूथ योजना से जोड़ने पर बल दिया गया।

संदेश यात्रा

एक हल्का सा मोड़ कठपुतली के माध्यम से पाली गांव में उस समय आया जब हम संदेश यात्रा के दौरान पानी की महत्वता को बता रहे थे। पूर्व सूचना के बावजूद गांव के प्रधान के समक्ष इसमें पाली के एक तिहाई लोग भी शामिल नही हुए मजबूरन नजदीकी एक सरकारी स्कूल के बच्चों को पोपेट शो के माध्यम से पर्यावरण और पानी की जानकारी दी गई।

उपभोक्ता पानी समूह का गठन

चूकि पाली गांव सडक से काफी दूर था, इसलिए हर  दिन  पाली जाना लोक विज्ञान संस्थान के कार्यकर्ताओं  के लिए सम्भव नही था। अब तो पाली समुदाय बैठकों के नाम पर हमें देखते ही छुपने की कोशिश भी करने लगे, तो ऐसे में समूह का गठन करना अपने में ही एक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देता था। काफी कोशिशों के बाद  आखिरकार पाली गांव में संयुक्त रूप से महिलाओं और पुरषों का एक समूह बन गया और उनकी जिम्मेदारियों को बखूबी से समझाया गया, ताकि हमसे लोग जुडे रहे साथ ही हमारी टीम भी पूरी पारर्दशिता के साथ समुदाय का विश्वास जीतने की कोशिश में जुटी रहे ।

बैंक खाता/आय व्यय

उपभोक्ता पानी समूह पाली का खाता पंजाब नेशनल बैंक चैलूसैंण में खोला गया, जिसमें सहमति के आधार पर अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष तथा सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों के माध्यम से खाते का संचालन किया जाना था इसी खाते में समुदाय का योगदान, भुगतान, श्रमदान आदि शामिल था।

योजना का नियोजन

ग्रामीण सहभागिता मूल्याकन (पीआरए) के माध्यम से यह निकल कर सामने आया कि  इस गांव में सबसे ज्यादा समय, पानी ढोने में लगता है, जिसमें सबसे अधिक  महिलाएं  एंव बच्चे प्रभावित होते थे। गांव में शादीयों एंव सामाजिक आयोजनो में पानी लाने का कार्य पहले महिलायें करती थी, लेकिन विषम परिस्थितियों के चलते घोडे, खच्चरों का उपयोग किया जाने लगा।

तकनीकी आंकलन

लोक विज्ञान संस्थान के तकनिकी कार्यकर्ताओं द्वारा परिस्थितियों का आंकलन किया गया तथा जिसमें कुल बजट का 25 प्रतिशत् गांव के सम्पूर्ण परिवारों को देना था। विस्तारित तकनीकी विवरण तैयार किया गया  जिसमें गांव को लगभग एक लाख बीस हजार रूपये नगद योगदान के रूप में जमा करने थे।जो कि इतने कम परिवारों को काफी बड़ी रकम थी।

नगद अंशदान-श्रमदान

समुदाय को प्रशिक्षणों के माध्यम से पहले से ही समझाया गया था कि, किसी भी कार्य के  लिए आपका शेयर 25 प्रतिशत योगदान या श्रमदान के रूप में देय होगा। लेकिन पाली सोलर लिफिटिंग योजना के लिए नगद योगदान ही  देना होगा । लोक विज्ञान संस्थान के कार्यकर्ताओं को भी इतनी बड़ी रकम ग्राम स्तर पर इकट्ठा करवाना सम्भव नही लग रहा था, लिहाजा ऐसे कार्य प्रारम्भ किये गये जो पहले से प्रस्तावित थे जैसे-खंतियों का निर्माण, वृक्षा रोपण, पानी की गुणवत्ता एंव मापन आदि।

अंशदान में साझी समझ

वर्ष 2020 में गांव पाली के एक सामुहिक कार्य के लिए गांव के पलायन परिवार भी घर आये हुए थे, और उनके साथ भी बैठकें हुई जिसमें उन्होने इस कार्य को स्वीकार किया। ग्रामीण मांग के आधार पर  एक लाख बीस हजार जमा करने पर सहमति बानी और  इस योगदान में सबसे अधिक भूमिका पलायन परिवारों ने निभाई।

जमीन का  विवाद 

तकनीकि मानकों को देखते हुए 2 टैंकों का निर्माण तथा पाइप लाइन के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के सम्बन्ध में बैठक आयोजित की गई जिसमें गांव के ही एक व्यक्ति  (गणेश) ने अपनी स्वेच्छा से एक टैंक के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराई ।

महिलाओं का भरोसा 

‘‘भैजि बल हम छन जुगता ता नि आन्दू पाणि, हमारा गौं मा‘‘ ये शब्द हर रोज होते थे  गांव की महिलाएं शकुन्तला, सुधा तथा सुलोचना देवी को ‘‘किलै नि आलु पाणि, काम होणू च बल‘‘ कह कर हम भी मुस्कराते हुए आगे बढ़ जाते थे। आखिरकार ! अप्रैल 2021 से कोरोना महामारी के चलते टैंकों के निर्माण, का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया। काफी उतार-चढ़ाव  के बाद स्रोत का टैंक मानकों के अनुरूप बन गया। अब पाली गांव के महिलाओं एंव बूजूर्गों को विश्वास होने लगा कि, पाली गांव में पानी आ जायेगा, लेकिन कैसे? ये सवाल उनके मन को झकझोरता रहता था कि, सूरज का सोलर प्लेटों से रिश्ता और सोलर का पानी से यह कैसे सभ्भव हो सकता है ।

सोलर पैनल और सोलर लिफिटिंग,फोटो साभार :मकान सिह, भण्डारी 

सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग

जुलाई 2021 तक 2 टैंकों का निर्माण कार्य पूरा होने के साथ-साथ पाइप लाइन फिटिंग का कार्य सावन माह मे वर्षा घूप के कशमकश के बीच पूरा हुआ। अगस्त 2021 तक सोलर प्लेटें लगने के बाद सोलर मोटर जो कि 5 एच0पी0 की है, बरसात के मौसम में बादलों के बीच निकलती घूप की किरणों के साथ पानी पाली गांव के देहलीज तक पहुंच गया।


योजना का समायोजन

पूरा सर्वेक्षण के आधार पर हमें पाली गांव में 4 सामुदायिक स्टैंड पोस्ट लगाने थे, जिन पर तीन से चार परिवारों की निर्भरता होनी थी लेकिन, उत्तराखण्ड सरकार के माध्यम से हर घर जल, हर घर नल योजना लागू हुई जिसमें उन्होने पूरे गांव के हर एक घर को पाइप-लाइन से जोड़ा । पाली गांव के समुदाय की अपील पर इस योजना को ऊपरी टैंक के बाद, उस योजना से जोड़ा गया है। जो कि 1 किमी0 के आस-पास है, और प्रत्येक घर के आंगन में आज पानी उपलब्ध है। इस पूरी योजना पर कुल खर्चा  लगभग 6 लाख के लगभग रहा, जिसमें एक लाख बीस हजार रूपये समुदाय का नगद योगदान रहा।

इस हकीकत को देखने से खिले महिलाओं एंव बच्चों के चेहरे,फोटो साभार :मकान सिह, भण्डारी 

जिम्मेदारी एंव रखरखाव

जब इस  हकीकत से  गांव की महिलाएं और बच्चे रुबरुह हुए तो उनके चेहरे खिल गए और हमे देखकर दूर से ही  हमारा अभिवाददन करने लगे। कुछ समय बाद पानी उपभोक्ता समूह ने ही बैठक का आयोजन किया और हमें भी पूरी योजना के आय व्यय समझने के लिए बुलाया ।  मैने भी उनका निमत्रण  स्वीकार करते हुए आय व्यय का ब्यौरा समुदाय के सामने रखा और नियमित रूप से पानी की मोटर को चलाने एंव बंद करने के लिए  ग्रामीण जल कार्यकर्ता की नियुक्ती का प्रस्ताव ग्रामीणों से साझा किया। इसके बाद यह तय हुआ कि  प्रत्येक परिवार को  प्रति माह जल कर के रूप में 100/- मासिक देना होगा और प्रत्येक माह के 5 तारीख तक  उपभोक्ता पानी समूह के पास  यह धनराशि जमा होगी और समूह जल कार्यकर्ता को 1200/- प्रति माह देना अनिवार्य होगा ।

गांव में पानी की समस्या को दूर करने के लिए जिस तरह से पाली गांव के लोगों ने समुदाय बनाकर प्रयास किये है वो वाकई में हिमालय और पहाड़ी क्षेत्रों में रह रहे लोगों  के लिए प्रेणादायक है। अगर वे भी पाली जैसा प्रयास कर पाए तो उन्हें कभी-भी पानी की कमी के चलते अपने घर- बार छोड़ने की नौबत से सामना नहीं करना पड़ेगा।