पानी का अपना रंग क्यों नहीं होता है

पानी का बहुत सरल अणुओं ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से निर्मित है। जो अधिक मात्रा में ऊर्जा को अवशोषित नही कर पाता है । इसलिए जब भी दृश्य प्रकाश पानी से होकर जाता है। तो यह ऊर्जा को काफी मात्रा में अवशोषित नही कर पाता है। पानी की 2 क्वांटम अवस्था की उर्जाओं के बीच अंतर है वह बेहद कम होता है।इसलिए पूरक रंग उत्पन्न हीं होता है।

वही पानी की जब मात्रा कम होती है तो वह बेरंग दिखती है। साफ पानी थोड़ा नीला दिखाई देता है। लेकिन जब पानी का लेवल अधिक मात्रा में बढ़ जाता है तो यह गहरा नीला दिखाई देता है।  पानी नीला दिखाई देना का सबसे बड़ा कारण उसमें मौजूद अवशोषण गुण है। इसके अलावा  सफेद प्रकाश बिखरने से भी पानी का रंग हमारी आँखों को नीला दिखाई देता है लेकिन जब पानी गंदा होता है तो उसका रंग बदल जाता है। 

समुद्र के पानी का रंग भी नीला दिखाई देता है।

सबसे पहले यह बता दें कि पानी का कोई रंग नहीं होता है लेकिन यह सूर्य के प्रकाश की वजह से हमें नीला दिखाई देता है सूरज की किरणों में मौजूद बैंगनी,जामुनी, हरा,पीला, नारंगी और लाल को तो समुद्र अवशोषित कर लेता है । लेकिन नीले रंग की वेवलेंथ छोटी होने के कारण पानी कर रंग बदल जाता है। जिसकी वजह से समुद्र के पानी का रंग नीला दिखाई देता है।