प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयाँ बन्द कराने के निर्देश

Author:राष्ट्रीय सहारा
Source:राष्ट्रीय सहारा 6 सितम्बर 2015
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से दिये गए कुल अनापत्ति प्रमाण पत्रों की संख्या बताई जाये। इसके बाद जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव से कहा कि गाँव में जो भी पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली इकाइयों का संचालन हो रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये। यदि किसी भी प्रकार का सहयोग लिया जाना है, तो प्रदूषित होने वाली इकाइयों की जानकारी प्राप्त करने के लिये नोएडा एंटरप्रिन्यर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का सहयोग लिया जाये। नोएडा (एसएनबी)। गाँव में चल रही ऐसी सभी औद्योगिक इकाइयाँ, जो पर्यावरण को दूषित कर रही हैं, जिलाधिकारी ने बन्द करने के निर्देश जारी किये हैं। जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तत्काल कार्रवाई कर ऐसी इकाइयों को बन्द कराएँ। इस मामले में नोएडा एंटरप्रिन्यर्स एसोसिएशन (एनईए) का सहयोग लिया जाये। पर्यावरण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रुख अख्तियार करने के बाद जिला अधिकारी ने यह निर्णय लिया है।

एनजीटी ने कहा कि गौतमबुद्धनगर, गाज़ियाबाद की औद्योगिक इकाइयाँ भूजल दूषित कर रही हैं। कई इकाइयाँ तो सीधे हिण्डन और यमुना में अपना पानी छोड़ रही हैं। इससे भूजल तो दूषित हो ही रहा है। नदियों को भी दूषित किया जा रहा है। शासन ने इस मामले को गम्भीरता से लिया है और इस मामले पर जिला प्रशासन के समग्र बातचीत के लिये बैठक बुलाई है।

बैठक में नोएडा एंटरप्रिन्यर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियर, जिला उद्योग केन्द्र, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसमें शामिल एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन और उपाध्यक्ष धर्मवीर शर्मा से जिलाधिकारी की ओर से पूछा गया कि क्या नोएडा को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों का संचालन हो रहा है।

इस पर दोनों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि फेस वन, टू, थ्री औद्योगिक सेक्टर में पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली इकाइयाँ नहीं संचालित हो रही है, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण की ओर से प्रदूषण फैलाने वाली इकाई लगाने की अनुमति नहीं दी जाती, लेकिन नोएडा के गाँव में ऐसी बहुत सी औद्योगिक इकाई को संचालित किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने जिला उद्योग केन्द्र के उपायुक्त आरके यादव से पूछा कि क्या इस पर कोई ऐसा सर्वे कराया गया है, जिसमें इस प्रकार की इकाइयों को चिन्हित किया गया हो। अब तक किस प्रकार की औद्योगिक इकाइयों को एनओसी जारी की गई है। इसमें कितनी स्थायी और कितनी अस्थायी अनापत्ति प्रमाण पत्रों की संख्या है। इनका सेक्टरवार ब्यौरा दिया जाए।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण से दिये गए कुल अनापत्ति प्रमाण पत्रों की संख्या बताई जाये। इसके बाद जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव से कहा कि गाँव में जो भी पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली इकाइयों का संचालन हो रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये।

यदि किसी भी प्रकार का सहयोग लिया जाना है, तो प्रदूषित होने वाली इकाइयों की जानकारी प्राप्त करने के लिये नोएडा एंटरप्रिन्यर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का सहयोग लिया जाये। नोएडा प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियरों से भी इस मामले पर क्षेत्रीय अधिकारी बातचीत करें और तत्काल ऐसी इकाइयों को बन्द कराकर सूची प्रस्तुत करें।