प्रकृति को सहेजने का मिला ईनाम

Author:नमिता
जंगलजंगलउत्तराखण्डियों को प्रकृति प्रेमी कहा जाता है। ऐसा हो भी क्यों नहीं, चिपको व रक्षासूत्र जैसे वन बचाओ आन्दोलन इसी धरती पर हुए हैं। यही वजह है कि उत्तराखण्ड की हरियाली लोगो को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रकृति संरक्षण यहाँ की विशेषता है।

सामूहिक और व्यक्तिगत स्तर पर प्रकृति संरक्षण के लिये पुरष्कृत किये जाने के उदाहरण तो यहाँ बहुत मिलते हैं लेकिन ग्रामसभा के सन्दर्भ में ऐसा पहली बार हुआ है। राज्य के चमोली जनपद स्थित भेंटा ग्रामसभा को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये पंचायती राज मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया गया है।

पिछले वर्ष नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पंचायत दिवस के अवसर पर यानि 24 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री वीरेन्द्र चौधरी द्वारा भेंटा ग्राम पंचायत के प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी को यह सम्मान प्रदान किया है। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण अर्थात ‘ग्राम वन’ की स्थापना, पंचायत की सार्वजनिक सम्पत्तियों के गुणवत्ता युक्त निर्माण व उनकी सुरक्षा के लिये प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के तहत ग्राम पंचायत को आठ लाख रुपए व सम्मान पत्र भी प्रदान किया गया है।

बता दें कि चमोली जनपद के जोशीमठ विकासखण्ड के भेंटा ग्रामसभा ने विकास कार्यों और प्रकृति संरक्षण के बीच अनूठा तालमेल स्थापित किया है। ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी ने बताया कि विकास की होड़ में जंगल खत्म हो रहे थे लेकिन हमने ऐसा होने नहीं दिया। “जनदेश संस्था के सहयोग और 20 वर्षों के कठिन परिश्रम से हमने ग्रामसभा के आस-पास के क्षेत्र को फिर से हरा-भरा बना दिया। भेंटा गाँव का यह जंगल अब ग्राम पंचायत की सम्पत्ति है इसीलिये यह पुरस्कार सभी ग्रामवासियों के लिये गौरव की बात है।” लक्ष्मण सिंह नेगी ने कहा।

ग्रामसभा ने केन्द्र और राज्य सरकार से विकास कार्यों के लिये मिले धन के बेहतर प्रबन्धन हेतु पंचायत स्तर पर छह समितियों का गठन किया है। इन समितियों से हर ग्रामवासी को जोड़ा गया है ताकि विकास कार्य में सभी की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीणों के प्रयास से गाँव में लगभग बारह हजार बाँज के पेड़ों वाला जंगल तैयार हो चुका है। नतीजन अब महिलाओं को चारा इकठ्ठा करने के लिये गाँव से दूर नहीं जाना पड़ता वे जंगल से ही चारे का इन्तजाम कर लेती हैं। इतना ही नहीं जंगल में पैदा हुई चारा पत्ती के विक्रय से पंचायत को प्रतिवर्ष आठ हजार रुपए की आय भी हो रही है।

ग्राम प्रधान लक्ष्मण नेगी बताते हैं कि जंगल से लगभग 1400 बोझ हर वर्ष चारा पत्ती प्राप्त होती है, जिन्हें ग्रामीण आस-पास के पशुचारकों को बेचते हैं। ग्रामीणों से चारा-पत्ती के लिये कोई शुल्क नहीं लिये जाता है। मनरेगा योजना का भरपूर लाभ लेकर ग्रामसभा ने इसे पलायन रोकने का महत्त्वपूर्ण साधन बना दिया है। यहाँ इस योजना से चारा पत्ती विकास, सम्पर्क मार्ग, सुरक्षा दीवार, चाल-खाल, खेत मरम्मत आदि कार्य हो रहे हैं।

यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गाँव में रहने वाले 93 परिवारों को मनरेगा से साल में 100 दिन का रोजगार निश्चित तौर पर प्राप्त हो। गाँव में सार्वजनिक बहुद्देशीय भवन बनाने का काम लगभग पूर्ण हो चुका है। इसी भवन में एक पुस्तकालय व वाचनालय की भी शुरुआत की गई है। गाँव के प्राइमरी स्कूल के लिये विधायक निधि से तीन कम्प्यूटर भी स्वीकृत करवाए गए हैं।

गाँव में महिला मंगल दल, युवक मंगल दल का गठन करने के साथ ही आठ स्वयं सहायता समूह का गठन भी किया गया है। भेंटा गाँव के लिये प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण की मंजूरी भी मिल चुकी है। भेंटा गाँव को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर स्थानीय विधायक राजेन्द्र सिंह भण्डारी, क्षेत्र प्रमुख जोशीमठ प्रकाश रावत, जोशीमठ ब्लॉक के प्रधान संगठन महामंत्री बनवारी लाल, रंगकर्मी जीतेन्द्र कुमार, जनकवि अतुल शर्मा इस गाँव की उपलब्धियों पर खुशी व्यक्त करते हुए इस गाँव की तुलना गाँधी के ग्राम स्वराज से की। उनका कहना है कि स्वरोजगार के साधन से सम्पन्न यह गाँव अपनी जरुरतों का ख्याल रखते हुए विकास कार्यों और पर्यावरण के बीच समन्वय का एक बेहतरीन नमूना पेश कर रहा है।

भेंटा गाँव का सौन्दर्य अनुपम है। यहाँ पहुँचने के लिये बद्रीनाथ मार्ग पर स्थित हेलंग (बद्रीनाथ से 55 किलोमीटर पूर्व) से उर्गम घाटी के लिये मोटर मार्ग पकड़ना पड़ता है। यह मार्ग एकदम तंग हालत में है। 12 किलोमीटर के इस मार्ग को कई बार कल्प गंगा ने अपनी आगोश में लिया है। काफी दिनों तक इस मार्ग पर आवागमन अवरुद्ध रहता है। परन्तु खास बात यह है कि गाँव पहुँचने पर थकान, आनन्द में बदल जाता है।


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