फ्लोरोसिस के हजारों मरीज ढूँढे, कंफर्म एक भी नहीं

Author:प्रेमविजय पाटिल

1. जाँच करने के लिये लैब टेक्निशियन के अभाव में बनी यह स्थिति
2. 3 हजार 842 मरीजों में केवल सम्भावना, पुष्टि के लिये नहीं है कोई विकल्प


धार। जिले में राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत फ्लोरोसिस के हजारों मरीज अब तक चिन्हित किये जा चुके हैं। लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हो पा रही है। अभी तक जिले में एक भी लैब टेक्निशियन नहीं है जिससे कि सम्भावित मरीज के रक्त या पेशाब के नमूने से उसकी पुष्टि की जा सके।

दूसरी ओर अभी तक चिकित्सकों को भी इस मामले में प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। हालांकि कार्यक्रम के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरी ओर लैब टेक्निशियनों के बारे में स्थिति बताई जा रही है कि कम वेतन होने के कारण उम्मीदवार दूर शहरों से आने को भी तैयार नहीं है।

जिले में फ्लोराइडयुक्त पानी एक बड़ी समस्या है। इसके कारण विकलांगता से लेकर कई परेशानियाँ खड़ी हो रही हैं। जहाँ लगभग 12 विकासखण्ड में फ्लोराइडयुक्त पानी की समस्या हो वहाँ पर इस बीमारी की जाँच के लिये अभी तक सुविधा नहीं होना सबसे बड़ा चिन्ता का विषय है।

राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में केवल अभी तक कंसल्टेंट की ही नियुक्ति हो पाई है। इसके अलावा लैब टेक्निशियन की पोस्ट नहीं भर पाई। बताया जा रहा है कि अब तक बड़ी संख्या में लोगों की जाँच की जा चुकी है। लेकिन इन सम्भावित मरीजों के बारे में पुष्टि करना एक बड़ी चुनौती हो गई है।

 

सामग्री उपलब्ध, मानव संसाधन की कमी


बताया जाता है कि जिला चिकित्सालय में आयन मीटर उपलब्ध करा दिया गया है। जो कि तत्काल ही जाँच से यह बता देता है कि फ्लोरोसिस से व्यक्ति पीड़ित है या नहीं। खासकर इस मीटर से रक्त और पेशाब दोनों के ही नमूने से जाँच हो सकती है।

जिले में 3 हजार 842 मरीजों को दन्तीय फ्लोरोसिस के मरीज के तौर पर चिन्हित किया जा चुका है। लेकिन इनमें अभी तक एक भी मरीज की पुष्टि नहीं हो सकी। वजह यह है कि आयन मीटर को चलाने के लिये लैब टेक्निशियन नहीं है। मानव संसाधन की कमी से दिक्कत है। बताया जाता है कि ग्वालियर क्षेत्र से एक टेक्निशियन का चयन हुआ था लेकिन उन्होंने यहाँ ज्वाईन नहीं किया।

 

 

 

एक भी हैण्डपम्प नहीं हो चालू


दूसरी ओर हैण्डपम्प में फ्लोराइडयुक्त पानी आने पर उन्हें बन्द करने के निर्देश हैं। लेकिन जिले में अनेक स्थान पर बड़ी संख्या में हैण्डपम्प चालू है। इनका उपयोग किये जाने से फ्लोरोसिस फैल रहा है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा निर्देश दिये गए हैं कि किसी भी स्थिति में एक भी हैण्डपम्प को चालू नहीं रखा जाए जो कि फ्लोराइडयुक्त पानी देते हो। इसके पालन के लिये जिले में कवायद शुरू हो चुकी है।

जिले में टेक्निशियन नहीं होने से दिक्कत है। लगातार प्रयासों के बाद तीन हजार 842 मरीज चिन्हित किये गए हैं। हम इन्हें तमाम लक्षणों के बावजूद सम्भावित ही कह सकते हैं। क्योंकि जाँच के बाद ही हम आधिकारिक रूप से फ्लोरोसिस प्रभावित कह सकते हैं।
डॉ.एमडी भाटी, सलाहकार फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम

 

 

Latest

देहरादून और हरिद्वार में पानी की सर्वाधिक आवश्यकता:नितेश कुमार झा

भारतीय को मिला संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

जल दायिनी के कंठ सूखे कैसे मिले बांधों को पानी

मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी झील पर बीएमसी ने बनाया मास्टर प्लान

जल संरक्षण को लेकर वर्कशॉप का आयोजन

देश की जलवायु की गुणवत्ता को सुधारने में हिमालय का विशेष महत्व

प्रतापगढ़ की ‘चमरोरा नदी’ बनी श्रीराम राज नदी

मैंग्रोव वन जलवायु परिवर्तन के परिणामों से निपटने में सबसे अच्छा विकल्प

जिस गांव में एसडीएम से लेकर कमिश्नर तक का है घर वहाँ पानी ने पैदा कर दी सबसे बड़ी समस्या

गढ़मुक्तेश्वर के गंगाघाट: जहां पहले पॉलीथिन तैरती थीं, वहां अब डॉलफिन तैरती हैं