पीने के पानी के लिए संघर्ष करते जनजातीय क्षेत्र के ग्रामीण

Author:देव चौहान

देशभर में ऐसे कई गांव और शहर है जो इस वक़्त पानी की किल्लत से झूझ रहे है अक्सर लोगो को लगता है कि पहाड़ो में लोगो को पानी की किल्लत का सामना नही करना पड़ता होगा क्योंकि वहां नदियां है झरने है नौले धारा है ,लेकिन अगर बात उत्तराखंड जिले देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की करे तो यहां आज भी ऐसे कई गांव है जो ऊंचाई पर स्तिथ है । और पानी की कमी से झूझ रहे है यहां के प्राकृतिक जल स्रोत आज सूखने की कगार पर है क्योंकि जल स्रोतों के लिए जरूरी है कि हर बार यहां ठीक ठाक बारिश और बर्फबारी हो लेकिन पिछले साल अच्छी बर्फबारी न होने के कारण बहुत से गाँव पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे है

जिनमे से एक है ग्राम बैमु यहां के ग्रामीण बताते है कि वो लंबे अरसे से पानी की किल्लत से जूझ  रहे है और कई बार शासन प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक से भी मदद की गुहार लगा चुके है लेकिन उनकी समस्या को अभी तक हल नही किया गया और जिसकी वजह से उन्हें कई किलोमीटर दूर तक एक प्राकृतिक जल स्रोत से पानी हर रोज़ ढोना होता है।

यहां लोगो का मुख्य व्यवसाय खेती है जिसके लिए उन्हें पशुओं को भी रखना हित है। लेकिन उन पशुओं को पीने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी नही मिल पाता इसलिए अब ग्रामीण न सिर्फ करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर है बल्कि घोड़े खच्चरों पर पानी लाद कर गांव पहुँचाया  जाता है और सुबह 7 बजे इस जल स्रोत पर ग्रामीण एक लंबी कतार लगा कर अपनी बारी का इंतज़ार  करते है।

स्कूलों में पड़ रही लड़किया यहां स्कूल जाने से पहले पानी के संघर्ष के लिए जूझती हुई नजर आती है। और स्कूल की छुट्टी होने के बाद उन्हें फिर से पानी के इस संघर्ष से जूझना पड़ता है। न तो अभी तक शासन यहां इनके लिए कोई परमानेंट पाइप लाइन बिछा पाया और न ही कोई नेता इनके लिए पानी की ककी योजना स्वीकृत करवा पाया।

हालात अब ये है कि गाँव वालों को अब उनकी मर्जी पर छोड़ दिया गया है और सिर्फ चौमासे में ही इन गाव वालो को भरपूर मात्रा में पानी मिल पाता है क्योंकि तब कई नए जल स्रोत जन्म लेते है लेकिन बरसात खत्म होड़ ही इनका संघर्ष फिर शुरू हो जाता है वर्षा के पानी को सरंक्षित किया जा सके उसके लिए भी यहां कोई इंतजाम किये गए और अब इस बात का डर ग्रामवासियों को सत्ता रहा है कि इन्हें कही पानी की वजह से पलायन तो नही करना पड़ेगा क्योंकि ऐसे कई गावं देख गए है जो सिर्फ पानी की कमी की वजह से पलायन कर गए