पीएम मोदी का बचपन जहाँ गुजरा कभी वहां था सूखा आज बदल गई पूरी तस्वीर 

Author:शिवेन्द्र
Source:मन की बात

पीएम मोदी का बचपन जहाँ गुजरा कभी वहां था सूखा आज बदल गई पूरी तस्वीर (फोटोःमन की बात )

 पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण को लेकर बड़ी बात कही। पीएम मोदी ने कहा जल संरक्षण मेरे दिल के बेहद करीब है। उन्होंने कहा जहां मेरा बचपन  गुजरा  वह हमेशा से पानी की किल्लत रहती थी। हम पानी के लिए तरसते थे और पानी की एक-एक बूंद बचाना हमारे संस्कारों का हिस्सा रहा है। जन भागीदारी  से जल संरक्षण के मंत्र ने वहाँ की तस्वीर बदल दी है पानी की एक-एक बूंद को बचाना किसी भी तरफ पानी की बर्बादी को रोकना है यह हमारे जीवन शैली का हिस्सा बन जाना चाहिए।

हमारे परिवारों की यह कैसी परंपरा बन जाना चाहिए जिससे हमारे प्रत्येक सदस्य को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भारत के सांस्कृतिक जीवन में, हमारे दैनिक जीवन में, रचा बसा हुआ है। वहीं, बारिश और मानसून हमेशा से हमारे विचारों, हमारी फिलोसोसोफी और हमारी सभ्यता को आकार देते आए हैं। ऋतुसंहार और मेघदूत में महाकवि कालिदास ने वर्षा को लेकर बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।

साहित्य प्रेमियों के बीच ये कवितायें आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। ऋग्वेद के पर्जन्य सुक्तम में भी वर्षा के सौन्दर्य का खूबसूरती से वर्णन है। इसी तरह, श्रीमद् भागवत में भी काव्यात्मक रूप से पृथ्वी, सूर्य और वर्षा के बीच के संबंधों को विस्तार दिया गया है।सूर्य ने आठ महीने तक जल के रूप में पृथ्वी की संपदा का दोहन किया था, अब मानसून के मौसम में, सूर्य, इस संचित संपदा को पृथ्वी को वापिस लौटा रहा है।

वाकई, मानसून और बारिश का मौसम सिर्फ खूबसूरत और सुहाना ही नहीं होता बल्कि यह पोषण देने वाला, जीवन देने वाला भी होता है। वर्षा का पानी जो हमें मिल रहा है वो हमारी भावी पीढ़ियों के लिए है, ये हमें कभी भूलना नहीं चाहिए। वहीं इससे पहले भी प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने जल संरक्षण को लेकर उत्तराखंड की सच्चिदानंद की तारीफ की थी उन्होंने जल संरक्षण करने के उनके प्रयासों की सहराना की थी।

अक्सर मन की बात में पीएम मोदी पानी और पर्यावरण को लेकर चिंता जाहिर कर चुके है। और  इसके प्रति लोगों  को जागरूक करने के लिये उन स्थानों और नागरिकों के बारे बताते है जिन्होंने जल संरक्षण के लिए बेहतर कार्य किया ।

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