राजस्थान के जल-स्रोतों में नाइट्रेट स्तर

Author:एस.सी. गुप्ता, जी.एस.जैन
Source:राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान
राजस्थान में भूजल अन्वेषण हेतु किए गए जल परीक्षणों में अनेक स्थानों पर भू-जल में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित पेय-जल सीमा से अधिक पाई जाती है। राज्य के मध्यवर्ती एवं उत्तरी जिलों नागौर, चुरू एवं बीकानेर का काफी विस्तृत क्षेत्र नाइट्रेट समस्या से प्रभावित है। अन्य स्थानों पर नाइट्रेट युक्त जल सीमित भू-जल इकाइयों में बंटा है। यह देखने में आया है कि भूगर्भीय अधोगत जल-भण्डार (कन फाइन्ड जोन), अधोजल भंडारें (फ्रीएटिक जोन) की अपेक्षा कम दूषित है। साथ ही सतही जलभण्डार भी कतिपय प्रदूषित इकाइयों को छोड़कर प्रायः नाइट्रेट मुक्त हैं।

जल गुणवत्ता आंकलन में नाइट्रेट एक अति महत्वपूर्ण घटक है। जल-स्रोतों में नाइट्रेट की बढ़ती मात्रा विश्व व्यापी चिन्ता का विषय बन गया है। पेयजल या शिशु आहार में इसकी मात्रा 20.0 मि.ग्रा प्रति लीटर या अधिक होने पर इसका विषैला प्रभाव शिशुओं पर पड़ता है जिससे उनकी लाल रक्त कणिकाओं की आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता में कमी आती है और शरीर नीला पड़ने लगता है। आयुर्विज्ञान भाषा में इसे साइनोसिस या मेथगोग्लोबीनीमिया कहा जाता है। पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता का असर व्यस्कों पर भी देखा गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में किए गए एक अनुसंधान के अनुसर पेयजल में नाइट्रेट अधिक होने पर आमाशय कैंसर एवं अल्सर आदि होने का खतरा बना रहता है (एन.आर.सी., 1977)। आस्ट्रेलिया में किए गए एक अन्य सर्वेक्षण में स्त्रियों की भ्रूण संबंधी बीमारियों एवं पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता में सीधा संबंध पाया गया (स्क्रेग, 1982)। हमारे देश में यद्यपि नाइट्रेट जनित व्याधियों का स्वास्थ्य रिपोर्टों में उल्लेख नहीं है, तथापि पेयजल में इसके दुष्प्रभावों को नकारा नहीं जा सकता। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुरूप हमारे देश में भी भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद एवं भारतीय मानक संस्थान ने भी पेयजल में नाइट्रेट की सीमा 45.0 मि.ग्रा. प्रति लीटर निर्धारित की है।

जल-स्रोतों में नाइट्रेट बढ़ने का मुख्य कारण शहरी जल-मल निष्कासन की अनुचित पद्धति एवं कृषि में नाइट्रेट उर्वरकों का बढ़ता प्रयोग है। कृषि में प्रयुक्त इन उर्वरकों का अधिकतम 60 प्रतिशत भाग ही पौधों द्वारा शोषित किया जाता है एवं अधिशेष भाग वर्षाजल के साथ अन्य जलस्रोतों में पहुंचाता है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग राजस्थान के एक प्रतिवेदन के अनुसार प्रदेश के कुल 37889 गांवों में से 7305 गांवों के पेयजल स्रोतों में नाइट्रेट की मात्रा 100 मि.ग्रा. प्रति लीटर से अधिक पाई गई है जिससे इन स्रोतों की उपयोगिता में एक प्रतिकूल असर पड़ा है।

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