राजस्थान में शुद्ध पेयजल प्रबंधन के नए आयाम

Author:विजय शर्मा
Source:कुरुक्षेत्र, जनवरी 2013
पहले राजस्थान में शुद्ध पेयजल के लिए महिलाओं को सिर पर मटकी रखकर कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, लेकिन सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं की बदौलत अब राजस्थान शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रणी राज्य बन गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम (वर्ष 2011-12) के क्रियान्वयन के बाद राजस्थान ने देश में 75.37 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।राजस्थान का नाम सुनते ही रेगिस्तान की छवि सामने नजर आती है, लेकिन अब राजस्थान में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की बदौलत स्थितियां बदल गई हैं। राजस्थान के ग्रामीण न सिर्फ शुद्ध वातावरण में जीवनयापन कर रहे हैं बल्कि विभिन्न योजनाओं के जरिए उन्हें शुद्ध पेयजल भी मिल रहा है। राजस्थान में परंपरागत माध्यमों के जरिए शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जा रही है। साथ ही नगरों एवं अन्य संसाधनों का भी बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है। समय बदलने के साथ ही पेयजल का परिदृश्य भी बदलने लगा। यहां के शासन की दूरदृष्टि एवं श्रमजीवी लोगों की बदौलत दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित इंदिरा गांधी नहर परियोजना का सपना साकार हुआ। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दूरदृष्टि की वजह से प्रदेश में जहां पारम्परिक जलस्रोतों का जीर्णोद्धार हुआ है वहीं वृहद, मध्यम एवं लघु पेयजल परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से लोगों को पेयजल उपलब्ध हुआ है।

राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम (वर्ष 2011-12) के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश में 75.37 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। अकेले जोधपुर में भूजल निकालने के लिए पम्पिंग करने के लिए सरकार ने 12.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसी तरह चम्बल सवाई माधोपुर नादौती परियोजना के अंतर्गत चम्बल नदी में इनटेक-वैल बनाने के लिए 25.54 करोड़ रुपये वन विभाग को जमा करवाकर चालू किया गया है ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके। चम्बल नदी में जल स्तर एवं बहाव के लिए मॉनीटरिंग कमेटी बना दी गई है। फर्म द्वारा इन्टेक वैल के निर्माण के लिए जिओटेक्निकल जांच कर ली गई है। इन्टेकवैल तथा अप्रोच ब्रिज की स्ट्रकचरल ड्राइंग फर्म द्वारा आईआईटी दिल्ली को अनुमोदन हेतु मार्च 2012 को प्रस्तुत की गई थी, जिसकी अंशतः स्वीकृति जुलाई, 2012 में प्राप्त हो चुकी है।

इसी तरह भीलवाड़ा जिले को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति नीति निर्धारण समिति की 181वीं बैठक में 1020 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु विश्व बैंक से ऋण प्राप्त करने के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए। केंद्र सरकार के आर्थिक विभाग ने परियोजना के प्रस्ताव का अनुमोदन कर विश्व बैंक को भेजा। जोधपुर जिले की तहसील औसियां की पांचला-घेवरा-चिराई क्षेत्रीय योजना के अंतर्गत 595 ग्रामों व 892 ढाणियों को लाभान्वित करने बाबत नीति-निर्धारण समिति की 181वीं बैठक में 367.98 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई तथा योजना की विस्तृत अभियांत्रिकी हेतु अनुमानित लागत 3.25 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति एआरडब्ल्यूएससी मद में जारी किए जाने का निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिले, इसीलिए हैंडपंपों की मरम्मत के लिए अभियान चलाया गया। राज्य में चलाए गए हैंडपंप मरम्मत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 4 लाख 73 हजार 632 एवं शहरी क्षेत्रों में 80 हजार 566 हैंडपंपों को मरम्मत किया गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा यह नीतिगत निर्णय लिया गया कि भविष्य में विभिन्न जलप्रदाय योजनाओं पर खराब होने वाले सबमर्सिबल पम्पिंग सैटों की मरम्मत नहीं करवाई जाएगी एवं उनके स्थान पर नए पम्पिंग सैट ही लगाए जाएंगे, जिनकी न्यूनतम गारंटी अवधि 24 माह की होगी।

बजट भाषण 2012-13 में 3260 करोड़ रुपए लागत की 23 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की घोषणा की गई थी। इन परियोजनाओं से मरू जिलों बाड़मेर, चूरू, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, नागौर से लेकर भरतपुर, कोटा, झालावाड़ तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। वर्ष 2012-13 के बजट में बाड़मेर, जैसलमेर जिले के पोकरण, सिवाना एवं बालोतरा कस्बे तथा 171 गांवों को लाभान्वित करने के लिए पोकरण-फलसूण्ड परियोजना के द्वितीय चरण का कार्य सितम्बर, 2012 से प्रारम्भ हो चुका है। बाड़मेर जिले के समदड़ी कस्बे और 180 गांवों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से 218 करोड़ रुपये लागत से उम्मेद सागर धावा-समदड़ी परियोजना द्वितीय भाग का कार्य भी सितम्बर में ही शुरू करवाया जा चुका है। इसके लिए 177.35 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी कर दिया गया है। जिले के अन्य 172 गांवों को लाभान्वित करने के लिये बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के प्रथम क्लस्टर का कार्य भी मौके पर शुरू करवाया जा चुका है जिसके लिए 167.99 करोड़ का कार्यादेश जारी किया गया है। परियोजना के तहत 260 करोड़ रुपये के कार्य प्रथम क्लस्टर के तहत करवाए जाएंगे। सभी कार्य आगामी तीन वर्षों में पूरे कर लिए जाएंगे।

मारवाड़ क्षेत्र में पाली जिले के तखतगढ़ कस्बे और क्षेत्र के 111 गांवों को लाभान्वित करने के लिए जवाई पाली परियोजना (प्रथम क्लस्टर कार्य) के लिए 88 करोड़ रुपये के कार्य करवाए जाने की बजट में घोषणा की गई थी। इसके तहत 142 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी किए गए हैं। सितम्बर माह में यह कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है। अजमेर जिले के 113 गांवों को लाभान्वित करने के लिए अजमेर-पीसांगन परियोजना (52 करोड़ रुपये) के तहत गत जुर्लाइ, 2012 में 59.47 करोड़ के कार्य शुरू करवाए गए हैं। शहरी जलापूर्ति परियोजना मकराना, नागौर के शेष कार्य के लिए क्रमशः11.85 व 12.45 करोड़ रुपये के कार्य जुर्लाइ माह में आरम्भ हो चुके हैं। बारां जिले के अंता कस्बे और 42 गांवों के लिए नागदा, अंता, बलदेवपुरा परियोजना के तहत 57.10 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी कर सितम्बर माह में इसका कार्य आरम्भ कर दिया गया। हाड़ोती क्षेत्र में पेयजल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोटा जिले के 60 गांवों के लिए बोरावास मण्डाणा परियोजना के तहत 90.47 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया गया है। इसके तहत 99 करोड़ रुपये के कार्य करवाए जाएंगे। झालावाड़ जिले के 30 गांवों हेतु भीमनी वाटर सर्प्लाइ परियोजना के तहत 26 करोड़ रुपये के कार्यों को मूर्त रूप दिया जाएगा। विभागीय स्तर पर इसके लिए 24.47 करोड़ रुपये का कार्यादेश जुर्लाइ माह में जारी कर कार्य आरम्भ कर दिया गया था।

राजस्थान में केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगातार नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी के तहत बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना के जरिए टोंक जिले के 436 गांव एवं 2 कस्बों (टोंक एवं उनियारा) को पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा।

जलमणि कार्यक्रम


नीति निर्धारण समिति द्वारा भारत सरकार के ‘जलमणि कार्यक्रम’, जिसके तहत ग्रामीण विद्यालयों में बच्चों को स्वच्छ एवं जीवाणुरहित पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न प्रकार के छोटे फिल्टर/आरओ प्लांट लगाए जाने का निर्णय लिया गया। इस कार्यक्रम के तहत 17 करोड़ रुपये की लागत की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई एवं राज्य में 5000 विद्यालयों में प्रथम चरण के तहत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निविदाएं आमन्त्रित कर करीब 5.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई। जलमणि योजना के अन्तर्गत 5000 स्कूलों में टैरा फिल्टर/अल्ट्रा फिल्टर लगाने हेतु 6.75 करोड़ रुपये के कार्यादेश दिये जा चुके हैं एवं कार्य प्रगति पर है। इस कार्यक्रम से बच्चों को स्कूल में भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

आपणी योजना


राज्य सरकार की ओर से ग्रामीणों को शुद्ध एवं प्रचुर मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आपणी योजना शुरू की गई है। चुरू जिले में 6 कस्बों एवं 425 ग्रामों में पेयजल समस्या के निराकरण के लिए आपणी योजना के द्वितीय चरण का कार्य प्रस्तावित है, जिसका सर्वेक्षण कार्य एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के कार्य की 78.25 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई। आपणी योजना द्वितीय चरण के सर्वे तथा विस्तृत अभियांत्रिकी रिपोर्ट तैयार करने के कार्य की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। परियोजना के लिए विश्व बैंक से बाह्य वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जा चुके हैं। वर्तमान में परियोजना की विस्तृत अभियांत्रिकी रिपोर्ट तैयार करने हेतु 78.15 लाख रुपये की अनुमानित लागत के सर्वे एवं अनुसंधान आदि कार्य किया जा रहा है। सर्वे का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार अब परियोजना के सुजानगढ़ भाग का क्रियान्वयन नाबार्ड ऋण से करवाया जाना प्रस्तावित है तथा कार्यादेश जुलाई, 2012 में दे दिया गया है।

नागौर को मिलेगा शुद्ध पेयजल


नागौर शहर में पेयजल संकट के समाधान के लिए 2.5 एमएलडी अतिरिक्त पेयजल इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से लाने के लिए, अस्थाई व्यवस्था के तहत स्वीकृति जारी की गई जिससे ग्रीष्म ऋतु, 2010 में नागौर शहर की जनता को शुद्ध पेयजल संकट से राहत मिली।

खारे पानी से मिली निजात


भरतपुर जिले में भूजल अत्यधिक खारा है। कम वर्षा एवं अत्यधिक दोहन होने से भूगर्भीय लवणों की घुलनशीलता से दिन पर दिन यह और भी खारा हो रहा है। रूपवास, भरतपुर, कुम्हेर, डीग, नगर, कामां व पहाड़ी खारे पानी की समस्या से सर्वाधिक प्रभावित हैं। जिले में कोई सतही जल स्रोत न होने से धौलपुर जिले में प्रवाहित हो रही चम्बल-धौलपुर-भरतपुर वृहद् पेयजल परियोजना प्रस्तावित की गई है। इस परियोजना को दो चरणों में विभक्त किया गया है। प्रथम चरण के प्रथम भाग की 166.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने जारी की, जिसके अन्तर्गत धौलपुर में चम्बल नदी से भरतपुर के मलाह हैडवर्क्स तक मुख्य पाइपलाइन बिछाने व जलशोधन संयंत्र के कार्य की स्वीकृति जारी की गई थी। राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप ट्रांसमिशन पाइपलाइन का कार्य पूर्ण कर चम्बल नदी का पेयजल भरतपुर को 25 दिसम्बर, 2011 से उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस महत्वकांक्षी परियोजना के द्वितीय चरण के अन्तर्गत भरतपुर से कुम्हेर होते हुए डीग, नगर, कामां एवं पहाड़ी तक मुख्य ट्रांसमिशन पाइपलाइन के कार्य और भरतपुर के मलाह हैडवर्क्स से भरतपुर की तहसील के सर्वाधिक खारे पानी की समस्या से ग्रस्त 97 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने के कार्यों के लिए 311.49 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा 20 अप्रैल, 2012 को जारी की गई। प्रस्तावित ट्रांसमिशन मेन पाइपलाइन में जिले की कुम्हेर, नगर, डीग, कामां एवं पहाड़ी तहसील के 599 गांवों में चम्बल नदी के शोधित पानी की आपूर्ति की जाएगी।

चम्बल-धौलपुर-भरतपुर परियोजना की मुख्य ट्रांसमिशन पाइपलाइन से रूपवास में ऑफटेक देकर रूपवास तहसील के खारे पानी की समस्या से ग्रस्त 30 गांवों को चम्बल नदी का पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के विस्तृत तकनीकी प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। महत्वाकांक्षी चम्बल-धौलपुर-भरतपुर वृहद् पेयजल परियोजना से भरतपुर जिले के 5 शहरों एवं 945 गांवों (वर्ष 2001 की गणना) की वर्ष 2031 तक पेयजल मांग को पूरा करने की क्षमता है। इस परियोजना के पूर्ण होने से जिले के विकास में गति आएगी तथा भूगर्भीय जल के खारेपन में भी कमी आएगी। इस परियोजना से भरतपुर में स्थित राष्ट्रीय केवलादेव पक्षी विहार को 10 अक्टूबर, 2011 से जल उपलब्ध कराना प्रारम्भ कर दिया गया है। फरवरी, 2012 तक 280 एमसी एफटी जल उपलब्ध कराकर पक्षी विहार के गम्भीर जल संकट को दूर किया गया है। परियोजना के अन्तर्गत प्रथम भाग में भरतपुर तहसील के 95, कुम्हेर के 2, रूपवास के 30 गांव लाभान्वित होंगे। प्रथम चरण के द्वितीय भाग में भरतपुर तहसील के 62, कुम्हेर के 115, रूपवास के 112, नगर के 164, डांग के 119, कामां के 114 तथा पहाड़ी तहसील के 132 गांव लाभान्वित होंगे।

रेतीली ढाणियों तक पहुंचा शुद्ध पेयजल


राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा हाल के वर्षों में किए गए चौतरफा प्रयासों का ही परिणाम है कि रेगिस्तानी इलाकों में आम जन तक शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचने लगा है। मरुस्थलीय क्षेत्रों की जल समस्या का समाधान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या के समाधान की दृष्टि से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की कुल 285 जल योजनाओं के माध्यम से जिले के 600 गाँवों और 1 हजार 557 ढाणियों को पेयजल सुविधा से लाभान्वित किया जा रहा है। इनमें 81 क्षेत्रीय जलप्रदाय योजनाओं से 396 गांवों व 854 ढाणियों को तथा हैंडपंप योजनाओं से 105 गांवों व 703 ढाणियों को पेयजल सुविधा मिल रही है। इसी प्रकार पंप व टैंक योजना से 82 गांवों, डिग्गी योजनाओं से 13 गांवों तथा पाईप्ड योजनाओं से 4 गांवों को पेयजल सुविधा से जोड़ा हुआ है।

मीठे पानी की मिलेगी सौगात


केंद्र एवं राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि मरुथल में भी शुद्ध एवं स्वच्छ मीठा पेयजल आसानी से उपलब्ध हो गया है। बाड़मेर लिफ्ट कैनाल परियोजना के पूरा होने के बाद इलाके में शुद्ध पेयजल संकट हमेशा के लिए खत्म हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से अब मरुस्थलीय इलाके के लोगों को भी आसानी से स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पा रहा है। इस परियोजना का शिलान्यास 7 फरवरी, 2003 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ही जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ तथा बाड़मेर शहर में किया था। इस परियोजना से सम्बन्धित कुल पानी की मांग 172 एमएलडी निर्धारित है जिसमें सैन्य क्षेत्र के लिए पानी की मांग 52 एमएलडी है। जैसलमेर जिले में मोहनगढ़ के पास स्थित इन्दिरा गांधी नहर से लिफ्ट करके इसे बाड़मेर के लिए पहुंचाया जा रहा है। इस परियोजना के अन्तर्गत मोहनगढ़ स्रोत पर 38 हजार 450 लाख लीटर क्षमता की डिग्गी है जबकि इससे सम्बन्धित फिल्टर प्लांट भी मोहनगढ़ स्रोत पर स्थित है जिसकी क्षमता 172 एमएलडी है।

परियोजना के अन्तर्गत मोहनगढ़ एवं भागू का गांव फाटा में एक-एक पम्पिंग स्टेशन स्थापित है। मोहनगढ़ (जैसलमेर) से लेकर बाड़मेर तक कुल 196 किलोमीटर लम्बी पाईपलाईन बिछाई गई है तथा कुल पम्पिंग हैड 200 मीटर है। इस परियोजना पर कुल 668 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय हो चुकी है। बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना में टड्रोंक मैन में लाभान्वित करने के लिए कुल 529 गांव स्वीकृत हैं। इनमें विधानसभा द्वारा स्वीकृत गांवों में शिव में 162, बायतु में 151, सिवाना में 2, पचपदरा में 3 तथा बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र के सभी 211 गांव स्वीकृत हैं। इसी प्रकार क्लस्टर में स्वीकृत गांवों में इस परियोजना के अन्तर्गत बायतु विधानसभा क्षेत्र के 145, सिवाना में एक, पचपदरा में तीन तथा बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र में 90 गांव स्वीकृत हैं। बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना के द्वितीय चरण में विभिन्न क्षेत्रों को पेयजल से लाभान्वित किया जाएगा। इसके लिए क्लस्टर पार्ट ‘ए’ व ‘बी’ निर्धारित है। क्लस्टर पार्ट-ए के अन्तर्गत भाड़का-चोखला-बान्द्रा परियोजना से कुल 172 गांव लाभान्वित होंगे। इनमें तहसील बायतु के 128, बाड़मेर के 40, पचपदरा के तीन तथा सिवाना का एक गांव शामिल है। इस योजना के लिए 202.36 करोड़ रुपये का कार्य आवन्टित किया जा चुका है।

इस तरह देखा जाए तो केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रयास से उन इलाकों में भी शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो पा रहा है, जहां यह संभव ही नहीं बल्कि नामुमकिन समझा जाता था। लेकिन सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई और रेगिस्तान में नहरों के जरिए पानी पहुंचने लगा है। विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सेंटरों पर पानी को शुद्ध करने के प्लांट लगाए गए हैं। नगरों के जरिए सेंटरों तक पहुंचने वाला यह पानी प्लांट से शुद्ध होकर ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रहा है। ग्रामीण मीठे एवं शुद्ध पानी का आनंद ले रहे हैं। शुद्ध एवं मीठा पानी उपलब्ध होने की वजह से रेगिस्तानी इलाके में होने वाली तमाम पानीजनित बीमारियां भी खत्म होने लगी हैं। इससे इलाके के लोगों में खुशहाली आई है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)