सिंचाई जल की गुणवत्ता : सिंचाई के लिए अपशिष्ट मल जल की उपयुक्तता

Author:चक्रेश कुमार जैन, यतवीर सिंह, राकेश कुमार गोयल
Source:राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान

इस प्रपत्र के अंतर्गत बी. एच. ई. एल. कॉम्पलैक्स, हरिद्वार के अपशिष्ट जल नमूने का अध्ययन किया गया है। विश्लेषण किए गए अपशिष्ट जल के रासायनिक आंकड़ों से स्पष्ट है कि अध्ययनित क्षेत्र का अपशिष्ट जल नमूने मध्यम लवणीय एवं कम SAR क्षेत्र की श्रेणी में आता है, जो सिंचाई के लिए उपयुक्त है। यू.एस. (U.S) लवणीय प्रयोगशाला का सिंचाई जल वर्गीकरण भी दर्शाता है कि यह पानी अधिकतर फसलों एवं मृदा की सिंचाई के लिए सुरक्षित है। यह अनुमोदन उस समय लिए गए नमूने के आधार पर अनुमोदित है। इसलिए अध्ययन के अनुसार यह अपशिष्ट जल सिंचाई के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है।

कृषि के विकास में सिंचाई का बहुत बड़ा महत्व है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि पर आधारित होने के कारण कृषि विकास में सिंचाई की महत्वता और भी बढ़ जाती है। पौधों के जीवन एवं बढ़ोतरी के लिए पानी बहुत आवश्यक है। बीज के अंकुरण से लेकर बढ़ोतरी तक की सभी रसायनिक क्रियाएं पानी की उपस्थिति में ही होती हैं। अधिक उत्पादकता किस्म के बीज एवं रसायनिक खाद का पूर्ण लाभ भी सिंचाई से ही संभव हो पाता है। जिस तरह देश में जनसंख्या वृद्धि हो रही है तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो और इस कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए सिंचाई की विस्तृत सुविधाएं होना बहुत जरूरी है। यहां पर सिंचाई अधिकतर वर्षा पर आधारित है वर्षा मनुष्य के वश से परे है। इसलिए वर्षा पर निर्भर रहकर कृषि उत्पादकता को नहीं बढ़ाया जा सकता। मानसून की वर्षा अपर्याप्त होने के कारण कृषि का विकास अन्य सिंचाई पर अत्यधिक निर्भर करता है। इसलिए सिंचाई के आधुनिक एवं कृत्रिम साधन जुटाना अति आवश्यक है। इसके साथ-साथ कृषि सिंचाई में उपयोग लाए जाने वाले जल की गुणता का उपयुक्त होना अति आवश्यक है। उचित भूमि एवं जल प्रबंधन के साथ-साथ अच्छी गुणता के जल से सिंचाई करने पर सम्भावित उत्पादकता को अत्यधिक बढ़ाया जा सकता है।

सिंचाई जल की गुणता सामान्यतया उसमें उपस्थित साद (सिल्ट) एवं लवणों आदि तत्वों पर निर्भर करती है। सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले जल में प्रायः कुछ तत्व निश्चित मात्रा में घुले होत हैं जिनकों सामान्यतयाः लवण कहते हैं। मूल रूप से घुले हुए पदार्थों, लवणों खनिजों आदि की प्रकृति एवं गुणवत्ता, प्राप्त होने वाले जल के स्रोत पर निर्भर करती है। जल की गुणता उचित न होने पर कृषि उत्पादन पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए जल को उपयोग करने से पहले उसकी गुणता की जांच करना आवश्यक है, जिससे कृषि में भरपूर उत्पादन लिया जा सके।

सिंचाई जल, कृषि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन यदि भूमि एवं जल प्रबंधन इसे सावधानीपूर्वक नहीं परखता तो कृषि के लिए यह अपूर्णीय क्षति का कारण बन सकता है। सिंचाई जल एवं मृदा में अकार्बनिक खनिज, लवणों की कुछ सांद्रता आवश्यक है, जो पौधों के लिए पोषक तत्वों के रूप में कार्य करती है। लेकिन इन तत्वों की मात्रा अत्यधिक हो जाने से फसल पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार पानी का खारापन सिंचाई जल की एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके द्वारा भूमि का खारा हो जाना एक धीमी प्रक्रिया है इसलिए इसका जानकारी पहले से होनी चाहिए अन्यथा इसकी अधिकता होने से भारी नुकसान पहुंचता है। अध्ययन किया जाने वाला नमूना, अपशिष्ट मल जल से लिया गया है, जिला हरिद्वार में बी.एच.ई.एल. कॉम्पलैक्स का वाहित मल पिछले 20-30 वर्षों से बहादराबाद के निकट टैंकों में एकत्रित किया जा रहा है। जिसके अपशिष्ट जल का उपयोग आस-पास की खेती योग्य भूमि की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इसलिए सिंचाई हेतु इस अपशिष्ट मल जल की उपयुक्तता जांचने के लिए यह नमूना लेकर अध्ययन किया गया।

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