संयुक्त राष्ट्र में डूबते आइलैंड की कविता सुन रो पड़े नेता

Author:दैनिक भास्कर टीम
Source:दैनिक भास्कर, 25 सितंबर 2014
हम ऐसी जमीन पर सो रहे हैं, जो कब्र जैसे लगने लगी है। हम बच्चों को देखते हैं तो विचार आता है कि पता नहीं वे कैसे जीएंगे और संस्कृति और संस्कृति को किस तरह बचाएंगे जलवायु परिवर्तन समूचे विश्व के लिए बड़ा संकट बन गया है। दुनिया के कई हिस्सों में इस विकट पर्यावरणीय संकट से बाहर निकलने की सुगबुगाहट देखी जा सकती है। कई देशों की सरकार भी इस हालात को सुधारने में जुट गई है। पिछले दिनों जलवायु परिवर्तन के विषय पर संयुक्त राष्ट्र में पर्यावरण सम्मेलन हुआ। वहां कैथी किजिनर (26) नामक कवियत्री मार्शल द्वीप से आई थीं। अमेरिकी राज्य हवाई और आॅस्ट्रेलिया के बीच स्थित अंगूठी जैसा मार्शल द्वीप साल दर साल डूब रहा है। अब यह समुद्र के जलस्तर से 6 फीट भी ऊपर नहीं है।

इस द्वीप के बारे में बताया जा रहा कि इसका जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है और कुछ साल बाद यह समुद्र में समा जाएगा। कैथी ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विश्व नेताओं के समक्ष अपने जैसे द्वीपों और वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर एक कविता पढ़ी। उसे सुनकर वहां मौजूद कई देशों के नेता रो दिए। सभी ने न केवल कैथी को सराहा, बल्कि उनकी कविता के शब्दों को दुनिया के बड़ा संदेश बताया।

कैथी के साथ उनके पति और सात माह की बच्ची थी। वे दर्शक दीर्घा में बैठे थे। उन्होंने कहा- हम ऐसी जमीन पर सो रहे हैं, जो कब्र जैसे लगने लगी है। हम बच्चों को देखते हैं तो विचार आता है कि पता नहीं वे कैसे जीएंगे और संस्कृति और संस्कृति को किस तरह बचाएंगे।

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