सफलता की कहानी, भाग -1

Author:सुनील चतुर्वेदी, सोनल शर्मा
Source:पानी का अर्थशास्त्र (रेवासागर अध्ययन रिपोर्ट)
मैं, कृषक महेंद्र सिंह पिता श्री रण बहादुर सिंह चावड़ा निवासी ग्राम - टोंकखुर्द विकास खंड टोंकखुर्द जिला देवास का कृषक होकर मेरे स्वामित्व में लगभग 30 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक है पिछले कुछ वर्षों में मेरे कुल 10 ट्यूबवेलों का खनन कार्य करवाया गया था, लेकिन ट्यूबवेल से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। इन ट्यूबवेलों के खनन में लगभग 4,00,000 रूपये कुल लागत आई है। ज़मीन की सिंचाई हेतु मेरे द्वारा ट्यूबवेल खनन कार्य करवाकर यह व्यय किया गया, किंतु पर्याप्त पानी मिलने के कारण मुझे परेशानियों का सामना करना पड़ा और मैं पूरी तरह से हताश हो गया।

पिछले लगभग 3-4 वर्षों से सूखा की स्थिति पैदा होने के कारण कलेक्टर महोदय श्रीमान उमाकांत उमराव द्वारा चलाए गए रेवासागर अभियान से प्रभावित होकर मैंने 3 हेक्टेयर भूमि में रेवा सागर तालाब का निर्माण किया, जिसमें लगभग 8.00 लाख रूपये व्यय हुए। उक्त रेवा सागर तालाब बरसात के पानी से पूरी तरह भर गया और इससे मेरे खोदे गए नलकूप और कुओं में पर्याप्त पानी आ गया। जिसका लाभ यह हुआ कि मेरी 30 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह सिंचित हो गई। इसी के चलते 10 हेक्टेयर भूमि में डाला चना, 5 हेक्टेयर भूमि में देसी चना एवं 15 हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती इस वर्ष में ली जा रही है इससे मेरी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सकेगी। साथ ही रेवा सागर की पाल पर हरियाली महोत्सव के अंतर्गत मैंने आंवला के 260 पौधे, नीम के 100 पौधे, रतनजोत के 500 पौधे लगाए गए हैं। रतनजोत लगाने से शासन की मंशानुरूप बायो डीजल उत्पादन करने के उद्देश्य को पूरा किया जा सकेगा। इसके लिए भी मैने मेरे विकास खंड के कृषकों को समझाईश दी।

(महेंद्र सिंह पिता रणा बहादुर सिंह चावड़ा), ग्राम टोंकखुर्द विकास खंड टोंकखुर्द

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