सफलता की कहानी, भाग -3

Author:सुनील चतुर्वेदी, सोनल शर्मा
Source:पानी का अर्थशास्त्र (रेवासागर अध्ययन रिपोर्ट)
मैं, कृषक रघुनाथ सिंह पिता माधोसिंह निवासी- ग्राम मेंढकी धाकड़ जिला देवास, मेरी तथा परिवार के सदस्यों की कुल ज़मीन 10.00 हेक्टेयर थी, ग्राम में पिछले वर्षों में नलकूप योजना के अंतर्गत विकास खंड में सर्वप्रथम 1962 में नलकूप खनन कराया था, उससे सारी जमीन सिंचित होती थी, किंतु धीरे-धीरे वर्षा की कमी से सभी नलकूप धीरे-धीरे सूख गए मेरे द्वारा करीब 20 नलकूप खुदवाए उनमें पर्याप्त पानी नहीं मिला और धीरे-धीरे सभी सिंचित रकबा बिल्कुल कम हो गया, पिछले तीन वर्षों से तो रबी फसल में लाखों रुपए का नुकसान होता गया। जिससे हमारी आर्थिक स्थिति बिल्कुल कमजोर हो गई।

वर्ष 2006 में श्रीमान् उमाकांत उमराव कलेक्टर सा. के विशेष प्रयास से पड़त भूमि में करीब 4.00 हेक्टेयर क्षेत्र तालाब का निर्माण किया गया। जिसमें करीब 5.00 लाख का खर्च आया। वर्षा में पूरा तालाब भर गया इस वर्ष तालाब से करीब 5.00 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.00 गेहूं तथा 2.00 में चना फसल ले रहा हूं। इससे अनुमानतः 2.50 लाख तक की आमदनी होगी। शासन के इस प्रयास से मुझे बहुत फायदा होगा। इसमें मेरे द्वारा मछली पालन भी किया जाएगा।

रघुनाथ सिंह पिता माधोसिंह, कृषक, निवासी मेंढकी धाकड़ जिला देवास (म.प्र.)

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