स्वयं अपने घर पर प्राकृतिक रंग बनायें

Author:संपादक
होली रंगों का त्योहार है जितने अधिक से अधिक रंग उतना ही आनन्द, लेकिन इस आनन्द को दोगुना भी किया जा सकता है प्राकृतिक रंगों से खेलकर, पर्यावरण मित्र रंगों के उपयोग द्वारा भी होली खेली जा सकती है और यह रंग घर पर ही बनाना एकदम आसान भी है। इन प्राकृतिक रंगों के उपयोग से न सिर्फ़ आपकी त्वचा को कोई खतरा नहीं होगा, परन्तु रासायनिक रंगों के इस्तेमाल न करने से कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाव होता है।

गहरा लाल -


लाल सुर्ख रंग, उत्सवप्रियता, शक्ति और उर्जा का रंग है। होली के अवसर पर यह रंग सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। इस होली में लाल रंग घर पर ही बनाने के लिये निम्न तरीका अपनायें -

• लाल गुलाब की पत्तियों को अखबार पर बिछाकर सुखा लें, उन सूखी पत्तियों को बारीक पीसकर लाल गुलाल के रूप में उपयोग कर सकते हैं जो कि खुशबूदार भी होगा।
• रक्तचन्दन (बड़ी गुमची) का पावडर भी गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है, यह चेहरे पर फ़ेसपैक के रूप में भी उपयोग होता है।
• रक्तचन्दन के दो चम्मच पावडर को पाँच लीटर पानी में उबालें और इस घोल को बीस लीटर के पानी में बड़ा घोल बना लें… यह एक सुगन्धित गाढ़ा लाल रंग होगा।
• लाल हिबिस्कस के फ़ूलों को छाया में सुखाकर उसका पावडर बना लें यह भी लाल रंग के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
• लाल अनार के छिलकों को मजीठे के पेड़ की लकड़ी के साथ उबालकर भी सुन्दर लाल रंग प्राप्त किया जा सकता है।
• टमाटर और गाजर के रस को पानी में मिलाकर भी होली खेली जा सकती है।

चमकदार हरा रंग -


प्रकृति का सबसे अधिक पाया जाने वाला रंग “हरा” है, यह रंग दया, पवित्रता और सदभाव का प्रतीक है। यह एक चिकित्सकीय प्रभाव वाला रंग है तथा सामान्यतः प्राकृतिक और जड़ीबूटी के रूप में पाया जाता है।

• गुलमोहर, पालक, धनिया, पुदीना आदि की पत्तियों को सुखाकर और पीसकर हरे गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
• किसी भी आटे की बराबर मात्रा में हिना अथवा दूसरे हरे रंग मिलाकर भी हरे गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
• एक लीटर पानी में दो चम्मच मेहंदी को घोलने पर भी हरे रंग का प्राकृतिक विकल्प तैयार किया जा सकता है।

जादुई नीला और गहरा बैंगनी -


बैंगनी रंग हमारे तमाम पूर्वाग्रहों को तोड़ने वाला रंग माना जाता है इसी प्रकार नीला रंग भी शांति और विश्वास के साथ ही नई रचनात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

• एक लीटर गरम पानी में चुकन्दर को रात भर भिगोकर रखें और इस बैंगनी रंग को आवश्यकतानुसार गाढ़ा अथवा पतला किया जा सकता है।
• 15-20 प्याज़ के छिलकों को आधा लीटर पानी में उबालकर गुलाबी रंग प्राप्त किया जा सकता है।
• नीले गुलमोहर के फ़ूलों को सुखाकर उसके पावडर द्वारा तैयार घोल से भी अच्छा नीला रंग बनाया जा सकता है।
• नीले गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर बारीक पीसने पर नीला गुलाल भी बनाया जा सकता है।

रोमांचक भगवा रंग


केसरिया और नारंगी रंग, खुशी, उत्सव और जोश तथा आशावाद का प्रतीक है।

• हल्दी पावडर और चन्दन पावडर को मिलाकर हल्का नारंगी पेस्ट बनाया जा सकता है।
• परम्परागत रूप से जंगलों में पाये जाने वाले टेसू के फ़ूलों को उबालकर भी नारंगी केसरिया रंग प्राप्त किया जाता है।

खुशहाल पीला रंग -


पीला रंग ऊर्जा, बुद्धि और जागरूकता का परिचायक होता है और इसीलिये यह रंग वसन्त का रंग भी कहलाता है।

• दो चम्मच हल्दी को चार चम्मच बेसन के साथ मिलाकर उसे पीला गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
• अमलतास और गेंदे के फ़ूलों की पत्तियों को सुखाकर उसका पेस्ट अथवा गीला रंग बनाया जा सकता है।
• दो चम्मच हल्दी पावडर को दो लीटर पानी में उबालें, गाढ़ा पीला रंग बन जायेगा।
• दो लीटर पानी में 50 गेंदे के फ़ूलों को उबालने पर अच्छा पीला रंग प्राप्त होगा…

आईये संकल्प करें कि प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलेंगे, रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं करेंगे, जल प्रदूषण नहीं फ़ैलायेंगे, पानी बचायेंगे और उल्लासमय होली मनायेंगे… होली है…

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