सुसवा नदी बांट रही है मौत

Author:देव चौहान


उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून के दक्षिण से होकर गुजरने वाली सुसवा नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी है की इसके लिए अब समाजसेवियों  स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम लोगो को सड़को पर उतर कर जागरूकता रैली निकालनी पड़ रही है स्थानीय लोगो का कहना है की इस नदी के सिलसिले में वो कई बार सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगा चुके है लेकिन सिस्टम है की इस और कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है और अब हालात ये हो चुके है की सुसवा नदी का जल दिन प्रतिदिन और प्रदूषित होता जा रहा है स्थानीय लोग इस नदी के जल को खेतो की सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल करते थे लेकिन अब जल इतना प्रदूषित हो चूका है कि प्रदूषित पानी से लोगो की फसलों को भी नुकसान  पहुंच रहा है इसके साथ ही

स्थानीय लोगो को इस प्रदूषित पानी की वजह से कई बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है जैसे चार्म रोग आदि इंसानो के अल्वा इस प्रदूषित पानी से जानवर भी प्रभावित हो रहे है क्यूंकि उनके लिए भी पानी पीने का यही एक मात्रा स्रोत है ,सुसवा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए मां कौशल्या बोरा फाउंडेशन के द्वारा स्थानीय लोगों व स्कूली छात्र छात्राओं के साथ डोईवाला में जागरूकता रैली निकाली गई, और डोईवाला तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।  

दृष्टिकोण समिति के अध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि देहरादून शहर का जितना भी कचरा है, वह रिस्पना व बिंदाल नदी के द्वारा सुसवा नदी में आकर मिलता है। सुसवा नदी पर ही कई गांव की सिंचाई व्यवस्था निर्भर है। और राजाजी नेशनल पार्क के जितने भी जानवर हैं, वह सभी यह पानी पीते हैं, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के पालतू मवेशी भी यही पानी पीने को मजबूर हैं,वही एक और ख़ास बात ये भी है की ये नदी गंगा जी में जाकर मिलती है और अपने साथ सभी गंदगी गंगा में लेकर जाती है इस नदी से सटे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर जैसी भयंकर बीमारी के लक्षण बढ़ रहे हैं, साथ ही देहरादून के प्रसिद्ध बासमती चावल की खेती भी प्रदूषित पानी से विलुप्त होती जा रही है।किसान नेता उम्मेद बोरा ने कहा कि सुसवा नदी को बचाने के लिए आज संयुक्त किसान मोर्चा, पूर्व सैनिक संगठन, मंगल दल व तमाम छात्र छात्राओं के साथ जागरूकता रैली के द्वारा सरकार को जगाने की कोशिश की गई है, उम्मीद करते हैं कि सरकार इस और जल्द ध्यान देगी और सुसवा नदी को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी