उत्तराखंड में प्राकृतिक जल स्रोतो के संरक्षण के लिए बनेगी कमेटी

Author:देव चौहान

हिमालय दिवस ,फोटो साभार-Dev 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में हिमालय दिवस पर हिमालय के संरक्षण के लिए शपथ दिलाई और श्रीमद्भागवत गीता पर संक्षेप व सरल भाषा में लिखी पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने श्री हरि मंदिर रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री धामी ने हिमालय के प्राकृतिक जल स्रोतों, धारों, नौलों के अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन के लिए एक कमेटी के गठन की बात कही। मुख्यमंत्री ने हिमालय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिमालय के संरक्षण में हम सभी की भागीदारी जरूरी है। सरकार के दोनों दायित्व तय हैं, जहां एक ओर हिमालय के संरक्षण के प्रति गंभीर रहना है, तो दूसरी ओर विकास के प्रति भी उतना ही दायित्व निभाना है।

उन्होंने कहा कि समूचे हिमालय से जुड़े राज्यों के लिए यहाँ की अलग भौगोलिक और स्थानीय परिस्थिति के अनुकूल अलग विकास मॉडल होना चाहिए। हमने नीति आयोग की बैठक में भी हिमालय के महत्वपूर्ण सरोकारों से जुड़े मुद्दों को साझा किया और इस संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव और प्रस्ताव भी साझा किए।

सीएम ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में सामाजिक विकास की आवश्यकता है, हमें इकॉलोजी एवं इकोनॉमी को साथ में रखते हुए कार्य करना होगा। हिमालय की जैव विविधता को संरक्षित करना है। जब हिमालय बचा रहेगा, तभी जीवन बचा रहेगा।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय का किसी राज्य व देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्व है। हिमालय के संरक्षण का दायित्व, हम सभी का है। हिमालय के संरक्षण के लिए यहां की संस्कृति, नदियों व वनों का संरक्षण जरूरी है। पर्यावरण में हो रहे बदलावों, ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही जल, जंगल, जमीन से जुड़े विषयों पर समेकित चिंतन की जरूरत है। सामाजिक चेतना तथा सामूहिक प्रयासों से ही हम इस समस्या के समाधान में सहयोगी बन सकते हैं।