उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

Author:डा0 भवतोष शर्मा

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय कार्यक्रम:,फोटो- यूसर्क

उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर यूसर्क द्वारा आज दिनांक 09 नवम्बर 2022 को तीन दिवसीय Hands on Training on “Microbiological Analysis of Water ” (जल के सूक्ष्म जैविक विश्लेषण विषय पर प्रयोगात्मक प्रशिक्षण)श् विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डालफिन पी0जी0 इंस्टीट्यूट के परिसर में प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यूसर्क की निदेशक प्रो0 (डा0) अनीता रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हम सभी को अपने राज्य को अग्रिम पंक्ति राज्य बनाने के लिये विज्ञान, शिक्षा एवं अनुसंधान सम्बन्धी गतिविधियों के माध्यम से प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति में पंच महाभूतों में से एक तत्व जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। यूसर्क द्वारा इस जल तत्व के महत्व को समझते हुये इसके विभिन्न प्रकार के अध्ययनों, संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य प्रारंभ किया गया है जिसके क्रम में यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिये आयोजित किया जा रहा है। प्रो0 रावत ने कहा कि जल के सूक्ष्म जैविक विश्लेषण (Microbiological Analysis of Water) का प्रशिक्षण विद्यार्थियों के लिये न केवल दैनिक जीवन अपितु आगामी शोध कार्यों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के विद्यार्थियों के लिये माईक्रो लेवल तक रिसोर्स एवं नालेज शेयरिंग (Resource & Knowledge Sharing up to Micro level) के माध्यम से विभिन्न प्रकार की हैण्डस आन टेनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन लगातार संचालित किया जा रहा है। यूसर्क की विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों को राज्य के दूरस्थ जनपदों तक पहुंचाया जा रहा है तथा राज्य के समस्त जनपदों में विद्यार्थियों वैज्ञानिक अभिरूचि एवं वैज्ञानिक चेतना विकसित करने हेतु STEM प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में Hands on Training on “Microbiological Analysis of Water” विषय पर प्रशिक्षण मैनुअल का विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि यूसर्क के वैज्ञानिक डा0 भवतोष शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के जलस्रोत प्रदेश के साथ-साथ आस-पास के अन्य प्रदेशों को भी जल उपलब्ध कराते हैं। इन जलस्रोतों में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल की उपलब्धता से मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में आने वाली कठिनाईयों में निजात पायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को करियर निर्धारण करने में दिशा प्रदान करेगा। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में हम सभी को जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

कार्यक्रम की संयोजक डाल्फिन इन्स्टीट्यूट, देहरादून की प्राचार्या डा0 शैलजा पंत ने कहा कि संस्थान द्वारा यूसर्क के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किये जा रहे इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान तथा हैण्डस आन टेनिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम का विशेषज्ञ व्याख्यान प्रो0 शैलजा पंत ने Basics of Microbiological testing of water Qualitative and Quantitative विषय पर देते हुये विषय की बारीकियों को समझाया। उन्होंने कहा कि जल में उपस्थित सूक्ष्म जीवों की संख्या का सही विश्लेषण करने के लिये हमें जल नमूनों को दी गयी गाइड लाइन्स के अनुसार संग्रहण एवं विश्लेषण करना चाहिये।

 

एसोसिएट प्रोफेसर डा0 गौरी सिंह ने MPN Test for Water Analysis विषय पर Hands on Training देते हुये कहा कि MPN Test जल में उपस्थित सूक्ष्म जीवों के अध्ययन के लिये बहुत महत्वपूर्ण एवं विश्वसनीय विधि है।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सह-संयोजक डा0 ज्ञानेन्द्र अवस्थी ने दिया। कार्यक्रम में कार्यक्रम सचिव डा0 अशोक कुमार सिंह, डा0 श्रुति शर्मा, डा0 पंकज कुमार, डा0 तृप्ती मलिक, श्री विजय तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में देहरादून, हरिद्वार एवं ऋषिकेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के 30 छात्र-छात्राओं द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया जा रहा है।

Latest

भारत में क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस

वायु प्रदूषण कम करने के लिए बिहार बना रहा है नई कार्ययोजना

3.6 अरब लोगों पर पानी का संकट,भारत भी प्रभावित: विश्व मौसम विज्ञान संगठन

अब गंगा में प्रदूषण फैलाना पड़ेगा महंगा!

बीएमसी ने पानी कटौती की घोषणा की; प्रभावित क्षेत्रों की पूरी सूची देखें

देहरादून और हरिद्वार में पानी की सर्वाधिक आवश्यकता:नितेश कुमार झा

भारतीय को मिला संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

जल दायिनी के कंठ सूखे कैसे मिले बांधों को पानी

मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी झील पर बीएमसी ने बनाया मास्टर प्लान

जल संरक्षण को लेकर वर्कशॉप का आयोजन